‘नटवर सर को वापस लाओ’, सड़कों पर उतरे 200 से ज्यादा बच्चे, कलेक्टर से मिलने के लिए पैदल चले कई किलोमीटर

नई दिल्ली (Viral News). अक्सर सरकारी स्कूल बदहाली और शिक्षकों की लापरवाही के लिए जाने जाते हैं. लेकिन मध्यप्रदेश के खरगोन से आई एक खबर ने यह धारणा बदल दी. यह कहानी एक ऐसे शिक्षक की है, जिसकी मेहनत ने न केवल स्कूल की सूरत बदली, बल्कि सैकड़ों बच्चों और उनके अभिभावकों को अपना मुरीद बना लिया. मामला खरगोन के सेगांव स्थित सरकारी सांदीपनि स्कूल का है, जहां गणित के शिक्षक नटवर पाटीदार के तबादले ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी.

यह विरोध का कोई पारंपरिक तरीका नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक पुकार थी. चिलचिलाती धूप में लाल पोलो टीशर्ट और चेक शर्ट पहने नन्हे-मुन्ने बच्चे जब अपने माता-पिता की उंगली थामकर सड़क पर उतरे तो हर देखने वाला ठहर गया. इन मासूमों की आंखों में सिर्फ एक ही लक्ष्य था- अपने पसंदीदा ‘नटवर सर’ को वापस लाना. यह पैदल मार्च महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षक के प्रति सम्मान की गूंज थी, जिसने अपनी लगन से शिक्षा के मंदिर में जान फूंक दी थी.

35 किलोमीटर का संकल्प और मासूमों की जिद

सेगांव के सांदीपनि स्कूल में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने वाले 200 से अधिक बच्चों ने तय किया कि वे अपने प्रिय शिक्षक नटवर पाटीदार के तबादले के खिलाफ 35 किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय में कलेक्टर से अपनी बात कहेंगे. सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह मार्च जब खरगोन की सड़कों पर पहुंचा तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. हालांकि, करीब 3 किलोमीटर के सफर के बाद डिप्टी कलेक्टर अनिल जैन ने बच्चों को बीच रास्ते में रोका और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.

शून्य से शिखर तक: नटवर पाटीदार का जादू

नटवर पाटीदार ने इस स्कूल के लिए जो किया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है. जिस स्कूल में कभी महज 54 छात्र हुआ करते थे, नटवर सर की मेहनत और पढ़ाने के अनोखे अंदाज की वजह से आज वहां 246 छात्र पढ़ रहे हैं. अभिभावकों ने दोटूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर उनके शिक्षक को वापस नहीं लाया गया तो वे अपने बच्चों का ‘मास ट्रांसफर सर्टिफिकेट’ (TC) ले लेंगे. उनके अनुसार, नटवर सर न केवल गणित के जादूगर हैं, बल्कि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयार करते रहे हैं.

कलेक्टर भाव्या मित्तल का बड़ा फैसला

इस पूरे मामले पर कलेक्टर भाव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि नटवर पाटीदार पर कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं था. दरअसल, दो शिक्षकों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण स्कूल का माहौल प्रभावित हो रहा था, जिसके चलते प्रशासनिक आधार पर दोनों को हटाया गया था. कलेक्टर ने नटवर पाटीदार के ट्रैक रिकॉर्ड और बच्चों के प्रति उनके समर्पण की सराहना करते हुए उनकी बहाली का रास्ता साफ किया. प्रशासन ने नटवर पाटीदार को वापस उसी स्कूल में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया है.

खरगोन की यह प्रेरक घटना देश के लाखों सरकारी शिक्षकों के लिए संदेश है कि असली कमाई वेतन नहीं, बल्कि छात्रों का वह अटूट विश्वास है, जो सरकार को भी अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर सकता है.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *