बचपन का शौक बन गया कमाई का जरिया.. ₹25 रुपए का खर्च और 250 की कमाई!

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Self employed business model: कोसकापुर में मुर्गी पालन ने मोहम्मद असद समेत कई लोगों को आत्मनिर्भर बनाया है, कम लागत में शुरू होकर यह व्यवसाय अच्छा मुनाफा और रोजगार का साधन बन चुका है. उन्होंने बताया कि वे रोजाना 30 से 50 किलो तक चिकन मीट की सप्लाई करते हैं. स्थानीय बाजारों में ताजा चिकन की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें रोजाना अच्छा मुनाफा हो जाता है.

अररिया. जिले के कोसकापुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग मुर्गी पालन का व्यवसाय कर रहे हैं. यह कारोबार न केवल लोगों को आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि उनके परिवार के भरण-पोषण का भी मजबूत साधन बन चुका है. मुर्गी पालन से जुड़े लोगों का कहना है कि कम लागत में शुरू होने वाला यह व्यवसाय आज के समय में बेहतर मुनाफा देने वाला साबित हो रहा है.

पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़े लोगों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस व्यवसाय की शुरुआत करना चाहता है तो सबसे पहले उसे यह तय करना चाहिए कि वह अंडा उत्पादन करना चाहता है या फिर चिकन (मीट) का कारोबार. अंडा उत्पादन के लिए लेयर नस्ल की मुर्गियों को पालना होता है, जबकि चिकन व्यवसाय के लिए ब्रायलर मुर्गियां पाली जाती हैं. दोनों ही व्यवसायों में बाजार की मांग लगातार बनी रहती है, जिससे आमदनी के अच्छे अवसर मिलते हैं.

बिचौलियों पर निर्भरता खत्म
कोसकापुर निवासी मोहम्मद असद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से मुर्गी पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे मुर्गियां पूर्णिया बाजार से मंगवाते हैं और फिर उनका वैज्ञानिक तरीके से पालन करते हैं. पालन के बाद वे खुद चौक-चौराहों और हाट-बाजारों में ताजा चिकन की सप्लाई करते हैं, जिससे उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.

स्वरोजगार के एक बढ़िया तरीका
मोहम्मद असद ने बताया कि बचपन से ही उन्हें मुर्गी पालन का शौक था, इसलिए उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाया. लंबे समय से इस काम को करने के कारण उन्हें अच्छा अनुभव भी हो चुका है, जिससे अब उन्हें नुकसान की आशंका बहुत कम रहती है. उनका कहना है कि जो लोग रोजगार की तलाश में हैं या स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह व्यवसाय काफी लाभदायक है. खास बात यह है कि कम पूंजी से भी इस कारोबार की शुरुआत की जा सकती है.

उन्होंने बताया कि वे रोजाना 30 से 50 किलो तक चिकन मीट की सप्लाई करते हैं. स्थानीय बाजारों में ताजा चिकन की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें रोजाना अच्छा मुनाफा हो जाता है. मुर्गी पालन के साथ-साथ चिकन सप्लाई का काम करने से आमदनी के दोहरे स्रोत बन जाते हैं. कुल मिलाकर, कोसकापुर क्षेत्र में मुर्गी पालन आज ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है.

इस काम में कितना लाभ
मुर्गी पालन में सबसे पहले चूजे की कीमत की बात करें तो ब्रायलर मुर्गी का एक दिन का चूजा आमतौर पर ₹25 से ₹40 में मिल जाता है, जबकि लेयर नस्ल का चूजा ₹35 से ₹50 तक मिलता है. ब्रायलर मुर्गी 35 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है और इसका वजन करीब 1.5 से 2 किलो होता है. बाजार में लाइव ब्रायलर चिकन ₹120 से ₹160 प्रति किलो के हिसाब से बिकता है, जिससे एक मुर्गी की कीमत लगभग ₹200 से ₹300 तक हो जाती है.

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Mohd Majid

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