भोपाल. भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वापसी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. यह फैसला सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि भाजपा और संघ के बीच चल रहे दीर्घकालिक समन्वय और रणनीतिक तालमेल का संकेत भी माना जा रहा है. मार्च 2022 से प्रदेश संगठन महामंत्री के तौर पर सक्रिय रहे शर्मा ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. अब उन्हें संघ के मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख बनाया गया है, जहां उनका मुख्यालय जबलपुर रहेगा.
शर्मा के कार्यकाल में भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज की और 2024 लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर विजय हासिल की. ऐसे समय में उनकी संघ में वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं. कई विश्लेषक इसे संगठन के अगले चरण की तैयारी मान रहे हैं, जहां भाजपा नए नेतृत्व को मौका देकर 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करना चाहती है.
संघ में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि प्रचारकों और संगठन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों को समय-समय पर नई जिम्मेदारियां दी जाती हैं. हितानंद शर्मा भी इसी प्रक्रिया के तहत अब संघ के बौद्धिक प्रकोष्ठ में नई भूमिका निभाएंगे. मध्य क्षेत्र यानी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में वैचारिक प्रशिक्षण और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी.
संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका
शर्मा को भाजपा के भीतर संगठन का रणनीतिक चेहरा माना जाता रहा है. उनके कार्यकाल में पार्टी ने बूथ प्रबंधन, डिजिटल समन्वय और कार्यकर्ता प्रशिक्षण पर खास ध्यान दिया.
• बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया गया.
• डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संगठन की सक्रियता बढ़ाई गई.
• कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और अनुशासन पर जोर दिया गया.
• सरकार और संगठन के बीच समन्वय बेहतर हुआ.
राजनीतिक संदेश और संभावित असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल पद परिवर्तन नहीं बल्कि भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है. प्रदेश में फिलहाल कोई बड़ा चुनाव नहीं है और संगठनात्मक सत्र भी नए चरण में प्रवेश कर रहा है.
- नए नेतृत्व को अवसर देने की तैयारी.
- 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत.
- संगठन में नई ऊर्जा और नई टीम की संभावित एंट्री.
संगठन महामंत्री पद की अहमियत
भाजपा में संगठन महामंत्री का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यही पद संघ और पार्टी के बीच सेतु का काम करता है. शर्मा के कार्यकाल में प्रदेश कार्यकारिणी गठन से लेकर जिला स्तर के फेरबदल तक कई फैसलों में उनकी भूमिका अहम रही. कुछ नेताओं के बीच असंतोष की संभावना भी जताई जा रही है, क्योंकि संगठनात्मक नियुक्तियों में शर्मा की भूमिका प्रभावशाली रही थी.
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