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- Maghi Purnima 2026, Significance Of Maghi Purnima In Hindi, Sarvartha Siddhi Yoga Significance, Rituals About Purnima In Hindi
8 घंटे पहले
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कल (रविवार, 1 फरवरी) माघी पूर्णिमा है। इस दिन माघ मास खत्म होगा और सोमवार से फाल्गुन महीना शुरु हो जाएगा। माघी पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। इस वजह से माघी पूर्णिमा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। रविवार और पूर्णिमा के योग में स्नान-दान के साथ ही सूर्य पूजा जरूर करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठें और ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, माघी पूर्णिमा पर तीर्थराज प्रयाग का कल्पवास भी खत्म हो जाता है। माघ मास में साधु-संत और भक्त प्रयागराज के संगम क्षेत्र में कल्पवास करते हैं। इस दौरान ये सभी लोग पूजा-पाठ, मंत्र जप, ग्रंथों का पाठ, सत्संग करते हैं। खान-पान में भी शुद्ध सात्विक आहार लेते हैं। माघी पूर्णिमा पर कल्पवास करने वाले संगम में स्नान करते हैं और फिर इनका कल्पवास पूर्ण हो जाता है।
जानिए माघी पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं
मान्यता है कि माघी पूर्णिमा पर प्रयागराज के संगम, गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा जैसे पवित्र नदियों में स्नान करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन नदी स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा जिसका असर जीवनभर बना रहता है।
जो लोग नदी स्नान करने में असमर्थ हैं, उन्हें घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय सभी तीर्थों का और पवित्र नदियों का ध्यान करते रहना चाहिए। ऐसा करने से भी घर पर ही नदी स्नान के समान पुण्य मिलता है।
माघ मास में सभी देवता जल में वास करते हैं। इस मान्यता की वजह से माघ मास में और इसकी अंतिम तिथि पूर्णिमा पर नदी स्नान करने की परंपरा है। ऐसा करने से भक्तों को देवताओं की विशेष कृपा मिलती है।
इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी, कंबल और स्वर्ण का दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।
माघी पूर्णिमा का व्रत रखने और भगवान विष्णु, महालक्ष्मी, भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
माघी पूर्णिमा पर अन्न, भोजन, जूते-चप्पल, कपड़े, घी, तेल, तिल, गुड़, धन का दान करना चाहिए।
पौराणिक कथा है कि सतयुग में राजा हरिश्चंद्र ने सत्य और धर्म के पालन के लिए अपना राज्य, परिवार, सुख, सबकुछ तक त्याग दिया था। जब वे कठिन समय में थे, तब उन्होंने माघ मास की पूर्णिमा पर गंगा स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की थी। उनकी भक्ति, सत्यव्रत और तप से प्रसन्न होकर भगवान ने उनके सारे कष्टों से मुक्त कर दिया। भगवान की कृपा से राजा हरिश्चंद्र को खोया हुआ सम्मान, परिवार, राज्य, सबकुछ वापस मिल गया।
सोमवार से शुरू होगा फाल्गुन मास
फाल्गुन मास (2 फरवरी से 3 मार्च तक) हर साल फरवरी-मार्च के बीच आता है। इस महीने में वसंत ऋतु की शुरुआत होती है। इस महीने में ऋतु परिवर्तन के कारण मौसम सुहावना और हल्का ठंडा रहता है। किसानों की फसलों के लिए ये समय बहुत अच्छा माना जाता है। इस महीने में स्नान, दान, मंत्र जप और तपस्या करने की परंपरा है।
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