‘दिल’ पर भारी पड़ रही गंदी लाइफस्टाइल! 10 साल में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में 170% का उछाल, आप भी तो नहीं निशाने पर?

राजधानी दिल्ली से सेहत को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है, जो हम सभी के लिए खतरे की घंटी है. हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में दिल की बीमारियों (Heart Disease) से होने वाली मौतों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2024 में हृदय रोगों के कारण 34,539 लोगों की जान गई, जो पिछले एक दशक के मुकाबले 170% से भी ज्यादा की वृद्धि दर्शाती है. यह स्थिति हमें अपनी लाइफस्‍टाइल और हेल्‍थ के प्रति अधिक गंभीर होने का इशारा कर रही है.

आंकड़े की बात करें तो नतीजा चौंकाने वाला हैं. दिल्ली सरकार की ‘मेडिकल सर्टिफिकेशन ऑफ कॉज ऑफ डेथ्स 2024’ की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में दिल्ली में कुल 34,539 लोगों की मौत हृदय रोगों की वजह से हुई. अगर हम एक दशक पीछे मुड़कर देखें, तो 2015 में यह संख्या मात्र 12,680 थी, यानी 10 वर्षों में 170% से ज्यादा की वृद्धि!  इतना ही नहीं, सिर्फ एक साल (2023 से 2024) के भीतर ही इन मौतों में 54% की छलांग देखी गई है. 2023 में यह आंकड़ा 22,385 था, जो अब बढ़कर 34 हजार के पार पहुँच गया है.

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?

खराब जीवनशैली (Lifestyle Habits):एम्स (AIIMS) के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, आज के समय में हमारा गलत खान-पान, बहुत ज्यादा तनाव और एक्सरसाइज न करने जैसी आदतें दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन रही हैं.

बढ़ती उम्र (Ageing Population): दिल्ली में बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ हृदय रोगों का खतरा भी प्राकृतिक रूप से बढ़ जाता है.

बेहतर रिपोर्टिंग (Detailed Reporting): मेदांता मूलचंद हार्ट सेंटर के डॉ. तरुण कुमार बताते हैं कि अब मौतों का रिकॉर्ड पहले से ज्यादा बारीकी और सटीकता से रखा जा रहा है. अस्पतालों के बाहर होने वाली मौतों को भी अब सही तरीके से ‘कार्डिएक अरेस्ट’ की श्रेणी में गिना जा रहा है, जिससे आंकड़ों में बढ़ोत्तरी दिख रही है.

डॉ. तरुण कुमार ने एक बहुत ही जरूरी बात कही है कि कोरोना महामारी के बाद से युवाओं में दिल की बीमारियों के मामले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. उनके अनुसार, नसों में कोलेस्ट्रॉल का जमा होना और अचानक खून के थक्के (Clots) जमना ही हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह बन रहा है. अक्सर हालत इतनी जल्दी बिगड़ जाती है कि मरीज को अस्पताल तक पहुँचाने का वक्त भी नहीं मिल पाता, यही कारण है कि अस्पताल के बाहर होने वाली मौतों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है.

आंकड़ों से समझें(2015-2024)-

  • 2015 में यह संख्या 12,680 थी.
  • 2020 में महामारी के दौरान रिपोर्टिंग की अस्पष्टता के कारण यह गिरकर 16,189 हो गई.
  • 2021 में इसमें 83% का बड़ा उछाल आया और मौतों का आंकड़ा 29,546 पहुंच गया.
  • 2024 में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा (34,539) दर्ज किया गया है.

क्‍या करें-
यह आंकड़े सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि हमारे लिए खतरे की घंटी भी हैं. दिल की बीमारियों के इस दायरे में सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियां (Hypertensive heart disease) और रूमेटिक हार्ट डिजीज जैसी गंभीर समस्याएं भी शामिल हैं. ऐसे में जरूरी है कि इनसे बचने के लिए अपनी डाइट (खान-पान) में सुधार करें, रोजाना एक्सरसाइज करें और समय-समय पर अपने दिल की जांच (Heart Checkup) करवाते रहें.

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