इंदौर. भागीरथपुरा इलाके में फैला दूषित पेयजल संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है. नगर निगम की लापरवाही से उपजे इस जल संक्रमण ने एक और जिंदगी छीन ली है. 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी की मौत के बाद इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है. बीते तीन दिनों में ही तीन लोगों की जान जाना इस बात का संकेत है कि हालात अब भी बेहद गंभीर हैं. उल्टी-दस्त से शुरू हुई बीमारी धीरे-धीरे जानलेवा संक्रमण में बदल गई और करीब 20 दिनों तक वेंटिलेटर पर संघर्ष के बाद एकनाथ सूर्यवंशी जिंदगी की जंग हार गए.
उल्टी-दस्त से शुरू हुई थी बीमारी
परिजनों के अनुसार, एकनाथ सूर्यवंशी को 29 दिसंबर को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी. शुरुआत में इसे सामान्य संक्रमण समझा गया, लेकिन हालत तेजी से बिगड़ती चली गई. पहले उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. जब वहां सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें बॉम्बे अस्पताल रेफर किया गया. डॉक्टरों ने बताया कि दूषित पानी से फैला संक्रमण उनके शरीर में तेजी से फैल चुका था.
किडनी और लिवर पर पड़ा गंभीर असर
इलाज के दौरान यह सामने आया कि संक्रमण ने एकनाथ सूर्यवंशी की किडनी और लिवर को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. हालत लगातार बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. करीब 20 दिन तक वे आईसीयू में भर्ती रहे. डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद संक्रमण पर काबू नहीं पाया जा सका और अंततः उनकी मौत हो गई.
वेंटिलेटर पर बीते जीवन के आखिरी दिन
परिजनों का कहना है कि एकनाथ सूर्यवंशी ने इलाज के दौरान असहनीय पीड़ा झेली. लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने से उनका शरीर कमजोर होता चला गया. इलाज के लिए सरकारी सहायता भी मिली, लेकिन दूषित पानी से फैले संक्रमण ने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को इतना नुकसान पहुंचाया कि बचाना संभव नहीं हो सका.
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
स्वर्गीय एकनाथ सूर्यवंशी अपने परिवार के मुख्य स्तंभ थे. उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां, एक बेटा और बेटे के दो छोटे बच्चे हैं. बेटा निलेश ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता है. परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती, तो शायद एकनाथ की जान बच सकती थी.
राहुल गांधी ने की थी अस्पताल में मुलाकात
भागीरथपुरा की इस त्रासदी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी जब इंदौर दौरे पर आए थे, तब उन्होंने अस्पताल में भर्ती एकनाथ सूर्यवंशी से मुलाकात की थी. उस समय भी परिजनों ने दूषित पानी और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायत की थी. इसके बावजूद हालात नहीं सुधरे और मौतों का सिलसिला जारी रहा.
तीन दिनों में तीन मौतों से बढ़ा आक्रोश
बीते तीन दिनों में भागीरथपुरा में तीन लोगों की मौत ने स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी. क्षेत्र में अब भी कई लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं.
जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने भागीरथपुरा में बढ़ती मौतों पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राज्य सरकार और नगर निगम को कटघरे में खड़ा किया.
जीतू पटवारी के प्रमुख बयान
- दूषित पानी से हो रही मौतें प्रशासन की विफलता हैं
- जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
- पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए
- 3 फरवरी को इंदौर में कांग्रेस धरना प्रदर्शन करेगी
घटनाक्रम एक नजर में
- 29 दिसंबर को उल्टी-दस्त की शिकायत
- निजी अस्पताल में भर्ती
- बॉम्बे अस्पताल रेफर
- 20 दिन वेंटिलेटर पर इलाज
- संक्रमण से मौत, आंकड़ा 31 पहुंचा
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