शिवकांत आचार्य
भोपाल. राजधानी में संतान सुख की आस लगाए बैठे नि:संतान दंपत्तियों के साथ बड़ा धोखा सामने आया है. शहर के अलग-अलग इलाकों में कई फर्जी IVF सेंटर खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जो बिना पंजीकरण, बिना अनिवार्य अनुमति और बिना योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज का दावा कर रहे हैं. भावनात्मक रूप से कमजोर दंपत्तियों को झूठे भरोसे, आकर्षक विज्ञापन और सफलता के दावों के जरिए फंसाया जा रहा है. इलाज के नाम पर उनसे लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में न तो तय इलाज होता है और न ही कोई मेडिकल जवाबदेही.
ये फर्जी IVF सेंटर बाहर से अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों का दावा करते हैं, लेकिन अंदर की सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है. कई सेंटरों में जरूरी मेडिकल उपकरण तक मौजूद नहीं हैं. IVF जैसे संवेदनशील और जटिल इलाज के लिए अनिवार्य पीसीपीएनडीटी एक्ट और एआरटी एक्ट के तहत अनुमति नहीं ली गई है. सबसे गंभीर बात यह है कि जिन विशेषज्ञ डॉक्टरों के नाम प्रचारित किए जाते हैं, उनका सेंटर से कोई संबंध ही नहीं होता. ऐसे में सवाल उठता है कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के बावजूद यह गोरखधंधा कैसे चल रहा है?
राजधानी में कैसे चल रहा है फर्जी IVF नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक राजधानी में कई IVF सेंटर बिना किसी वैध पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं. इन सेंटरों में इलाज के नाम पर दंपत्तियों से एक लाख से तीन लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है. कई मामलों में महीनों तक सिर्फ दवाइयां देकर इलाज का भ्रम बनाए रखा गया. मेडिकल स्टोर भी सेंटर के अंदर ही मौजूद रहता है और पर्ची पर लिखी दवाइयां वहीं से खरीदने को मजबूर किया जाता है. इलाज की कोई तय समय-सीमा नहीं होती, जिससे आर्थिक शोषण लगातार चलता रहता है.
गर्भपात के बाद भी नहीं रुकता खेल
कुछ मामलों में इलाज के दौरान गर्भपात होने पर सेंटर प्रबंधन मरीज की ही गलती बताता है. इसके बाद दोबारा इलाज शुरू करने की सलाह दी जाती है, यानी फिर से लाखों रुपये की मांग. भावनात्मक दबाव में दंपत्ति दोबारा इलाज के लिए राजी हो जाते हैं और ठगी का यह चक्र चलता रहता है.
किन नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां : फर्जी IVF सेंटर इन अहम कानूनों का पालन नहीं कर रहे हैं.
- नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन अनिवार्य
- पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अनुमति जरूरी
- एआरटी एक्ट के तहत IVF संचालन की मंजूरी
- योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ और एंब्रायोलॉजिस्ट की अनिवार्यता
मध्यप्रदेश में संभवत: पहली बार एक IVF सेंटर पर सख्त कार्रवाई सामने आई है. भोपाल जिला CMHO मनीष शर्मा के अनुसार अयोध्या बायपास स्थित मार्वल हॉस्पिटल की बिल्डिंग में ईश्वर्या फर्टिलिटी सेंटर अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था. इस सेंटर का पंजीयन नर्सिंग होम एक्ट के तहत नहीं कराया गया था. साथ ही IVF सेंटर के लिए अनिवार्य पीसीपीएनडीटी एक्ट और एआरटी एक्ट के तहत कोई अनुमति नहीं ली गई थी.
मार्वल अस्पताल की मशीन का इस्तेमाल भी जांच के घेरे में
जांच में सामने आया कि इस फर्जी IVF सेंटर में मार्वल अस्पताल की सोनोग्राफी मशीन का भी उपयोग किया जा रहा था. यह एक गंभीर अनियमितता मानी गई. इन तथ्यों के सामने आने के बाद IVF सेंटर को सील कर दिया गया है. CMHO मनीष शर्मा ने कहा कि जरूरत पड़ी तो सेंटर पर FIR भी दर्ज करवाई जाएगी और कानूनी सलाह ली जा रही है.
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