आम बजट के साथ कब से पेश किया जा रहा है रेल बजट, जानें पहले क्यों होता था अलग?

Railway Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं. यह उनका लगातार नौंवा बजट होगा. उन्होंने अपना पहला बजट 2019 में पेश किया था. भारत के बजट के इतिहास में सबसे जरूरी सुधारों में से एक रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय था. इससे 92 साल से चली आ रही प्रथा खत्म हो गई. 

रेल बजट और केंद्रीय बजट 

भारत में 2017 से रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ पेश किया जा रहा है. पहला संयुक्त बजट 1 फरवरी 2017 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेश किया था. उस साल से संसद में दो अलग-अलग वित्तीय बयानों के बजाय 1 फरवरी को सुबह 11:00 बजे सिर्फ एक समेकित बजट भाषण दिया जाता है.

पहले रेल बजट अलग क्यों था 

अलग रेल बजट की परंपरा 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी. इस फैसले को एक्वर्थ कमेटी की सिफारिश के बाद लिया गया था. उस समय भारतीय रेलवे कुल सरकारी खर्च का लगभग 84% था. इस वजह से इसे सामान्य बजट के तहत प्रबंधित करना काफी बड़ा और मुश्किल था.

औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में रेलवे का दबदबा 

आजादी से पहले के दौर में रेलवे भारत की अर्थव्यवस्था और प्रशासन की रीढ़ थी. माल ढुलाई, यात्री यात्रा, सैन्य लॉजिस्टिक्स और राजस्व सभी रेलवे पर काफी ज्यादा निर्भर थे. इस बड़े वित्तीय प्रभाव ने एक अलग रेल बजट को सही ठहराया. 

सालों में क्या हुआ बदलाव 

आर्थिक विविधीकरण और बाकी क्षेत्र के उदय के साथ कुल बजट में रेलवे का हिस्सा धीरे-धीरे कम होने लगा. 2016 तक भारतीय रेलवे कुल सरकारी खर्च का सिर्फ लगभग 15% ही था. एक अलग से बजट बनाए रखने का अब कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं रहा. 

बजटों को विलय करने का निर्णय

2016 में नीति आयोग के सदस्य विवेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली एक समिति ने रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ विलय करने की सिफारिश की. सरकार ने सरलीकरण, पारदर्शिता और बेहतर वित्तीय प्रबंधन की जरूरत का हवाला देते हुए प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया. इस फैसले से उस परंपरा का औपचारिक रूप से अंत हो गया जो 1924 से चली आ रही थी.

रेल बजट मर्जर के फायदे

इस मर्जर से कई फायदे हुए हैं. इसने बजट बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाया है और वित्त मंत्रालय को संसाधनों को ज्यादा कुशलता से बांटने के लिए अनुमति दी है. भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ी राहत यह थी कि उसे अब केंद्र सरकार को सालाना डिविडेंड का पेमेंट नहीं करना पड़ता था. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड, सुरक्षा सुधार और मॉर्डनाइजेशन के लिए फंड उपलब्ध हुआ.

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