आर्थिक सर्वेक्षण से पहले ICU में रुपया, टूटकर 92 पर पहुंचा रुपया, इस साल 2% की अब तक गिरावट

Rupee vs Dollar: केंद्रीय बजट से ठीक पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने के बीच भारतीय रुपये में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले टूटकर 92.00 के स्तर पर पहुंच गया, जो इसका ऐतिहासिक निचला स्तर है. डॉलर की लगातार मजबूत मांग और वैश्विक स्तर पर बने सतर्कता के माहौल के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है.

रुपये में क्यों इतनी बड़ी गिरावट?

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है. इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 91.95 प्रति डॉलर पर खुला और महीने के अंत में डॉलर की मांग बढ़ने के कारण 92 तक फिसल गया.

इससे एक दिन पहले बुधवार को भी रुपया 31 पैसे गिरकर 91.99 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि 23 जनवरी को यह पहली बार 92 के स्तर तक पहुंचा था. इस दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.29 प्रतिशत गिरकर 96.16 पर रहा.

धड़ाम से गिरा शेयर बाजार

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी दिखी, जहां सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 343.67 अंक टूटकर 82,001.01 पर और निफ्टी 94.2 अंक फिसलकर 25,248.55 पर आ गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.32 प्रतिशत बढ़कर 69.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई., हालांकि शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को लिवाल रहे और उन्होंने शुद्ध रूप से 480.26 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.

विश्लेषकों ने कहा कि डॉलर सूचकांक में नरमी के बीच रुपये ने ऊंचे स्तर पर शुरुआत की थी, लेकिन महीने के अंत में डॉलर की मांग आने और खराब निवेशक धारणा से यह सबसे निचले स्तर पर चला गया.

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