Jabalpur Protest News: जबलपुर में UGC की नई इक्विटी (Equity) रेगुलेशन गाइडलाइन को लेकर माहौल पूरी तरह गरमा गया है. कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में अब पढ़ाई से ज्यादा जाति को लेकर चर्चा हो रही है. SC, ST और OBC वर्ग के छात्र इसे भेदभाव रोकने वाला ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, तो वहीं सवर्ण वर्ग के स्टूडेंट खुद को टारगेट किए जाने का आरोप लगा रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि स्टूडेंट्स साफ तौर पर जातियों में बंटते नजर आ रहे हैं.
गाइडलाइन को लेकर भ्रम, स्टूडेंट्स में कन्फ्यूजन
छात्रों का कहना है कि UGC ने गाइडलाइन तो जारी कर दी, लेकिन उसे ठीक से समझाया नहीं. इसी वजह से अफवाहें फैल रही हैं. कोई इसे छात्रों के हित में बता रहा है, तो कोई इसे सवर्ण विरोधी फैसला कह रहा है. जनरल कैटेगरी के कुछ स्टूडेंट्स गुस्से में नजर आए और यहां तक कह दिया कि “हम परशुराम के वंशज हैं, सरकार को बताएंगे ब्राह्मण का क्रोध कैसा होता है.” इस तरह के बयानों ने विवाद को और हवा दे दी है.
UGC खुद सामने आकर दे स्पष्टीकरण
छात्र नेता सर्वम सिंह राठौर का कहना है कि वे खुद सवर्ण समाज से आते हैं, लेकिन गाइडलाइन को लेकर जानबूझकर भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं. उनका कहना है कि UGC को साफ बताना चाहिए कि इस गाइडलाइन से सवर्ण छात्रों को क्या नुकसान है और क्या फायदा. क्योंकि जब उद्देश्य ही जातिगत भेदभाव रोकना है, तो डर और भ्रम की राजनीति क्यों?
कमेटी में सवर्ण नहीं, तो न्याय की गारंटी कौन देगा?
छात्र मुकेश सिंह का आरोप है कि यह फैसला एकतरफा है. उनका कहना है कि इक्विटी कमेटी में सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया, जो इस गाइडलाइन की सबसे बड़ी खामी है. अगर भविष्य में किसी सवर्ण छात्र पर झूठा आरोप लगा, तो उसे न्याय कौन देगा? सरकार को सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए.
देर आए, दुरुस्त आए समर्थन में भी आवाजें
वहीं छात्र नेता अचलनाथ का कहना है कि यह फैसला बहुत जरूरी था. SC, ST और OBC छात्रों को अक्सर भेदभाव झेलना पड़ता है, अब उन्हें तुरंत राहत मिलेगी. वैष्णवी शर्मा, अर्पित पांडे और अंकित दुबे जैसे छात्रों का कहना है कि यह गाइडलाइन समाज को जोड़ने की बजाय हिंदुओं को आपस में बांटने का काम कर रही है.
आखिर क्या है UGC की नई इक्विटी गाइडलाइन?
UGC की यह नई गाइडलाइन उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव खत्म करने के लिए लाई गई है. इसके तहत एडमिशन, एग्जाम, नंबर, हॉस्टल, फीस, स्कॉलरशिप या व्यवहार में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकेगा. हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी कमेटी बनेगी, जिसमें SC, ST, OBC, महिला और दिव्यांग सदस्य होंगे. छात्र सीधे इसी कमेटी में शिकायत कर सकेंगे.
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