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India’s Longest Heart Transplant Survival: मध्य प्रदेश की एक महिला का हार्ट 25 साल पहले खराब हो गया था और उसकी जिंदगी बचाना मुश्किल हो गया था. तब दिल्ली एम्स के डॉक्टर्स ने हार्ट ट्रांसप्लांट कर उसे जीवनदान दिया था. अब महिला ने डोनर हार्ट के साथ 25 साल पूरे करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया है. यह भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट की सफलता को दर्शाता है. सीमित संसाधनों के दौर में हुआ महिला का ट्रांसप्लांट आज सभी के लिए मिसाल बन चुका है.
Heart Transplant Longest Survivor: हार्ट को हमारे शरीर के सबसे जरूरी ऑर्गन्स में शुमार किया जाता है. अगर हार्ट में कोई परेशानी आ जाए, तो पूरे शरीर का सिस्टम बिगड़ जाता है. कई बार हार्ट काम करना बंद कर देता है और ऐसी कंडीशन में हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है. हार्ट ट्रांसप्लांट एक बेहद जटिल सर्जरी है, लेकिन भारत इस मामले में दुनियाभर में सबसे आगे नजर आता है. देश में हर साल सैकड़ों हार्ट ट्रांसप्लांट किए जाते हैं और उनका सक्सेस रेट भी अच्छा होता है. अक्सर माना जाता है कि डोनर हार्ट के साथ व्यक्ति ज्यादा लंबी उम्र तक जीवित नहीं रहता है, लेकिन मध्य प्रदेश की 51 साल की प्रीति उन्हाले ने अनोखा कारनामा कर दिखाया है. उनका हार्ट ट्रांसप्लांट 25 साल पहले हुआ था और वे आज भी अपनी जिंदगी जी रही हैं.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक प्रीति उन्हाले ने डोनर हार्ट के साथ 25 साल पूरे कर इतिहास रच दिया है. प्रीति अब भारत की सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली हार्ट ट्रांसप्लांट सर्वाइवर बन गई हैं. उन्होंने 23 जनवरी 2026 को डोनर हार्ट के साथ 25 साल पूरे कर लिए. मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली प्रीति साल 2000 में इलाज की आखिरी उम्मीद लेकर दिल्ली एम्स पहुंची थीं. तमाम जगहों पर डॉक्टर्स ने जवाब दे दिया था, लेकिन एम्स ने उनकी उम्मीद नहीं तोड़ी. उन्हें डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी डायग्नोज हुआ था. यह एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर और फैली हुई हो जाती हैं, जिससे पंप करने की क्षमता घटती जाती है और आखिर में हार्ट फेल्योर हो जाता है. ऐसा ही प्रीति के साथ हुआ. तब उनकी उम्र सिर्फ 26 साल थी.
एम्स में प्रीति की मुलाकात देश के प्रख्यात कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. पी वेणुगोपाल और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. केके तलवार से हुई. पहली बार किसी डॉक्टर ने उनसे कहा कि आप ठीक हो जाएंगी. प्रीति बेहद नाजुक हालत में एम्स पहुंची थीं और उनकी शादी को ढाई साल ही हुए थे. उस दौर में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए ठोस क्लीनिकल गाइडलाइंस लगभग नहीं थीं. प्रॉपर जांच और लंबे इंतजार के बाद आखिरकार जनवरी 2001 में एक ब्रेन-डेड किशोर डोनर का हार्ट उपलब्ध हुआ और वही हार्ट प्रीति के जीवन का आधार बना. उस समय हार्ट ट्रांसप्लांट के नतीजे अनिश्चित माने जाते थे. सक्सेस रेट भी कम था, लेकिन प्रीति के पास कोई विकल्प नहीं था. ऐसे में डॉक्टर्स ने हार्ट ट्रांसप्लांट कर दिया.
प्रीति को हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद रोजाना इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेनी पड़ीं और कई बार ऑर्गन रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. हालांकि प्रॉपर ट्रीटमेंट के बाद वे इन सभी परेशानियों से उबर गईं. आज प्रीति उन्हाले देशभर में हार्ट ट्रांसप्लांट मरीजों को काउंसलिंग देती हैं. वही जानकारी और भरोसा बांटती हैं, जिसकी कभी उन्हें कमी थी. उनके लिए यह सिर्फ निजी जीत नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है. उनका संदेश साफ है कि अगर डॉक्टर ट्रांसप्लांट की सलाह दें, तो देर न करें. डोनर दुर्लभ होते हैं. मौका मिले तो तुरंत हां कहें. अनुशासन के साथ पूरी जिंदगी जिएं, क्योंकि यह हमें मिला हुआ दूसरा मौका है.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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