मुरादाबाद: आजकल जहां अधिकतर युवा पढ़ाई के साथ नौकरी की तलाश में लगे रहते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कारोबार के जरिए न सिर्फ अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोज़गार का जरिया बन रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है इरशाद अंसारी की, जिन्होंने महज 2 लाख रुपये की पूंजी से खादी उत्पादों का कारोबार शुरू किया और आज सालाना 15 लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर रहे हैं.
20 सालों से कर रहे हैं यह व्यवसाय
इरशाद अंसारी पिछले 20 वर्षों से खादी के काम से जुड़े हुए हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके पास न तो बड़ी दुकान थी और न ही ज्यादा संसाधन. उन्होंने सीतापुर से कच्चा माल मंगाकर खुद ही खादी की दरी, चादर, बेडशीट, पैरदान जैसे उत्पादों का निर्माण शुरू किया. शुरुआत छोटे स्तर पर हुई, लेकिन मेहनत, धैर्य और गुणवत्ता के प्रति ईमानदारी ने धीरे-धीरे उनके कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया.
देशभर में हो रही डिमांड
इरशाद कहते हैं कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है. उन्होंने शुरू से ही अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर खास ध्यान दिया. यही वजह रही कि उनके बनाए उत्पादों की मांग स्थानीय बाजार से निकलकर धीरे-धीरे पूरे देश में होने लगी. आज उनके खादी उत्पाद ऑल इंडिया स्तर पर बिक रहे हैं.
डिजिटल माध्यम से कारोबार को मिली गति
वे अपने उत्पादों को स्टॉल लगाकर भी बेचते हैं और ऑनलाइन माध्यम से भी ग्राहकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद उनके कारोबार को और गति मिली. इससे न सिर्फ बिक्री बढ़ी, बल्कि ब्रांड पहचान भी बनी.
दर्जनों लोगों को दे रहे रोजगार
इस कारोबार की सबसे खास बात यह है कि इरशाद सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रहे. उन्होंने अपने साथ दर्जनों लोगों को इस काम से जोड़ा और उन्हें रोज़गार दिया. आज कई परिवार उनकी इस पहल से आत्मनिर्भर बन चुके हैं. इरशाद मानते हैं कि अगर सही दिशा और ईमानदारी से काम किया जाए, तो कम पूंजी में भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है.
इरशाद अंसारी की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. खादी जैसे पारंपरिक उद्योग में भी आज अपार संभावनाएं हैं, बस जरूरत है सही सोच, मेहनत और धैर्य की.
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