Immune System Defeating Cancer : बिना इलाज के कैसे ठीक हो जाता है कैंसर? 25 साल की रिसर्च के बाद मिला बड़ा सुराग

Last Updated:

कैंसर का नाम सुनते ही हमारे मन में कीमोथेरेपी और कड़वी दवाओं का ख्याल आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर के भीतर ही कैंसर को हराने वाली एक ‘कुदरती दवा’ मौजूद हो सकती है? वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक ऐसी रिसर्च की है जो बताती है कि कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कैंसर को न केवल पहचान लेता है, बल्कि उसे बढ़ने से भी रोक देता है. अब कोशिश यह की जा रही है कि इसी कुदरती सुरक्षा तंत्र को एक नई दवा की शक्ल दी जाए.

अक्सर हम यही मानते हैं कि कैंसर(Cancer) बिना इलाज के शरीर में फैलता जाता है और जानलेवा साबित होता है. लेकिन चिकित्सा जगत में ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहाँ कैंसर शरीर में होने के बावजूद न तो बढ़ता है और न ही कोई लक्षण दिखाता है. न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, ड्यूक यूनिवर्सिटी के डॉ. एडवर्ड पैट्ज़ दशकों से इसी बात पर रिसर्च कर रहे थे कि आखिर कुछ लोग बिना किसी खास इलाज के भी कैंसर के साथ लंबे समय तक कैसे जीवित रह लेते हैं.

डॉ. पैट्ज़ ने पिछले 25 सालों में सैकड़ों कैंसर मरीजों के ट्यूमर और उनके खून के नमूनों की गहराई से जांच की. वह यह जानना चाहते थे कि जो मरीज जल्दी ठीक हो गए या जिनका कैंसर दोबारा नहीं लौटा, उनके शरीर में ऐसा क्या खास था. सालों की मशक्कत के बाद उन्हें मरीजों के खून के पीले हिस्से (सीरम) में एक बड़ा सुराग मिला—एक खास तरह की एंटीबॉडी, जिसे उन्होंने नाम दिया ‘GT103’.

रिसर्च में सामने आया कि फेफड़ों के कैंसर के जिन मरीजों के शरीर में यह ‘GT103’ एंटीबॉडी कुदरती तौर पर मौजूद थी, उनकी हालत दूसरों के मुकाबले काफी बेहतर रही. डॉ. पैट्ज़ को लगा कि अगर इस एंटीबॉडी को लैब में तैयार करके एक दवा का रूप दे दिया जाए, तो यह उन लाखों मरीजों की जान बचा सकती है जिनके शरीर में यह सुरक्षा तंत्र मौजूद नहीं है. इसी बड़े लक्ष्य के साथ उन्होंने अपनी कंपनी ‘ग्रिड थेरेप्यूटिक्स’ की शुरुआत की.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इस नई दवा का पहला परीक्षण (ट्रायल) उन 31 फेफड़ों के कैंसर के मरीजों पर किया गया, जिन पर इलाज के पुराने सभी तरीके फेल हो चुके थे. इस छोटे से ग्रुप पर हुए टेस्ट के नतीजे काफी दिलचस्प रहे. करीब एक-तिहाई मरीजों में कैंसर का बढ़ना कम से कम कुछ समय के लिए रुक गया. डॉक्टरों ने देखा कि दवा लेने के बाद ट्यूमर जस का तस बना रहा और उसने शरीर के बाकी हिस्सों को नुकसान नहीं पहुँचाया.

इस परीक्षण के दौरान एक मरीज के साथ तो ऐसा ‘चमत्कार’ हुआ जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. डॉ. हिरवा ममदानी ने बताया कि दवा देने के कुछ समय बाद उस मरीज का ट्यूमर पूरी तरह से गायब हो गया. ताज्जुब की बात यह है कि पिछले दो साल से किए जा रहे स्कैन में उस मरीज के शरीर में कैंसर का एक भी अंश नहीं मिला है. हालांकि यह सिर्फ एक मरीज का मामला है, पर इसने वैज्ञानिकों के उत्साह को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है.

अब वैज्ञानिक इस एंटीबॉडी को और ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए इसे ‘कीट्रूडा’ (Keytruda) नाम की मशहूर इम्यूनोथेरेपी दवा के साथ मिलाकर टेस्ट कर रहे हैं. डॉ. पैट्ज़ का मानना है कि उनकी दवा कैंसर की कोशिकाओं को सीधे मारती है, जबकि कीट्रूडा शरीर के बाकी इम्यून सिस्टम को और ज्यादा सक्रिय कर देती है. अगर ये दोनों दवाएं मिलकर काम करें, तो कैंसर का सफाया करना बहुत आसान हो जाएगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह विचार वाकई में बहुत शानदार है, लेकिन अभी यह सफर बहुत लंबा है. येल यूनिवर्सिटी के कैंसर एक्सपर्ट डॉ. रॉय हर्बस्ट ने बताया कि अक्सर शुरुआती ट्रायल में सफल दिखने वाली दवाएं बड़े स्तर पर होने वाले परीक्षणों में नाकाम हो जाती हैं. इसलिए, इस दवा को बाजार में आने और आम मरीजों तक पहुँचने में अभी काफी वक्त लग सकता है और इसके कई कड़े टेस्ट होने बाकी हैं.

homelifestyle

बिना इलाज के कैसे ठीक हो जाता है कैंसर? 25 साल की रिसर्च के बाद मिला बड़ा सुराग

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *