5 हजार के नौकर से बना 12 लाख का मालिक! गांव लौट खेत को बनाया नोट छापने वाली मशीन, लगा दी नोटों की झड़ी

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Sitamarhi Inspiring Farmer Success Story: शहर में 14-14 घंटे की गुलामी और महज 5 हजार की नौकरी से तंग आकर राजा कुमार सीतामढ़ी लौट आए. यहां उन्होंने पिता के 20 साल के अनुभव में अपना हुनर मिलाया और सब्जियों की खेती को मुनाफे के बिजनेस में बदल दिया. आज यह परिवार सालाना 12 लाख रुपये कमा रहा है.

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सीतामढ़ीः सीतामढ़ी जिले के बथनाहा प्रखंड अंतर्गत सोनमा गांव के रहने वाले युवा किसान राजा कुमार की कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं.  कभी प्रदेश में रहकर मामूली नौकरी करने वाले राजा कुमार अब अपने गांव लौटकर पिता की खेती में हाथ बंटा रहे हैं. इससे परिवार की आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. राजा बताते हैं कि वे जिद कर घर से बाहर नौकरी करने चले गए थे, लेकिन दो साल बाद उन्हें एहसास हुआ कि असली संभावनाएं तो खेती में ही हैं.

6 हजार की सैलरी में करते थे 14 घंटे काम
राजा कुमार ने बताया कि शहर में वे 5 से 6 हजार रुपये की नौकरी करते थे. जहां 12 से 14 घंटे लगातार काम करना पड़ता था. कम वेतन और कठिन जीवनशैली ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया. शहर की भागदौड़ से तंग आकर उन्होंने गांव लौटने का फैसला लिया और पिता के साथ खेत संभालने लगे. राजा का मानना है कि शहर में रहकर परिवार से दूर और सीमित आमदनी वाली नौकरी करने से बेहतर है कि गांव में रहकर आत्मसम्मान और सुकून के साथ खेती की जाए.

पिता के साथ जुड़ खेती से 12 लाख पहुंचाया आय
राजा कुमार के पिता पिछले 20 वर्षों से हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं. पहले परिवार की सालाना आय करीब 4 से 5 लाख रुपये हुआ करती थी, लेकिन राजा के खेती में जुड़ने के बाद यह आय बढ़कर 10 से 12 लाख रुपये तक पहुंच गई है. राजा आधुनिक तरीके और फसल चयन पर खास ध्यान दे रहे हैं. वे अगेती ब्रोकली की खेती कर बेहतर दाम हासिल कर रहे हैं. इसके अलावा सफेद गोभी, परवल, लौकी, खीरा और टमाटर जैसी फसलों की भी व्यवस्थित खेती की जा रही है. जिससे सालभर आमदनी का सिलसिला बना रहता है.

खेती का बनाया फायदे का सौदा
राजा कुमार की यह कहानी बताती है कि खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि सही योजना और मेहनत से यह लाभ का मजबूत माध्यम बन सकती है. शहर से गांव वापसी कर राजा ने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि यह भी साबित किया कि युवा यदि खेती को व्यवसाय की तरह अपनाएं, तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक और बेहतर जीवन जिया जा सकता है. उनकी सफलता आज क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी खेती की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर रही है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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