घर की रसोई से लाखों का कारोबार! पारस देवी जैन ने बदली उम्र की परिभाषा, चटनी ने झाजी अचार को भी पीछे छोड़ा

भीलवाड़ा. अक्सर यह माना जाता है कि 60 साल की उम्र के बाद जीवन रिटायरमेंट और आराम तक सीमित हो जाता है, लेकिन भीलवाड़ा की 65 वर्षीय पारस देवी जैन ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. भीलवाड़ा सिटी के शास्त्री नगर निवासी पारस देवी ने उस उम्र में खुद का बिजनेस शुरू किया, जब ज्यादातर लोग जिम्मेदारियों से मुक्त होकर शांत जीवन चुनते हैं. आत्मनिर्भर बनने के संकल्प के साथ उन्होंने पारंपरिक स्वाद को पहचान बनाते हुए खजूर और नींबू की चटनी का व्यवसाय शुरू किया.

आज उनकी यह चटनी राजस्थान से निकलकर गुजरात सहित अन्य बड़े शहरों तक अपनी मांग बना चुकी है. पारस देवी की यह कहानी बिहार के दरभंगा के प्रसिद्ध ‘झाजी अचार’ ब्रांड की याद दिलाती है, जिसने घरेलू रसोई से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाई है. पारस देवी न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनीं, बल्कि अपने बिजनेस से अन्य महिलाओं को जोड़कर उन्हें भी सशक्त बना रही हैं. यह कहानी साबित करती है कि जुनून हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती.

पारस देवी ने जैन ने ऐसे की शुरूआत

पारस देवी जैन ने लोकल 18 से खास बातचीत में बताया कि घर में बैठे-बैठे मन में विचार आया तो उन्होंने घरवालों के लिए नींबू की चटनी बनाई, जो सबको बहुत पसंद आई. इसके बाद 5 किलो नींबू की चटनी बनाकर विधिवत इस काम की शुरुआत की. सबसे पहले आस-पड़ोस के लोगों को चटनी चखाई गई, जिन्हें इसका स्वाद काफी पसंद आया. इसके बाद उन्होंने इसे व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया. अब उन्हें इस काम से अच्छा-खासा मुनाफा हो रहा है. यह चटनी वे पूरी शुद्धता के साथ घर पर ही बनाती हैं और इसमें किसी भी तरह के आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल नहीं करती हैं. सालाना मुनाफे की बात करें तो पारस देवी अपने घरेलू बिजनेस से करीब 4 लाख रुपए कमा रही हैं.

10 साल पहले की थी शुरूआत

यह काम पारस देवी ने करीब 10 साल पहले शुरू किया था. अब वे डिमांड के हिसाब से प्रति महीने एक हजार किलो से ज्यादा चटनी तैयार करती हैं. खजूर की चटनी के अलावा वे चाय मसाला, लहसुन पापड़, मंगोड़ी और अचार भी बनाती हैं. उनके बनाए अचार की मांग साउथ इंडिया तक है. पारस देवी बताती हैं कि उनके प्रोडक्ट दादी-नानी के बताए पारंपरिक तरीकों से तैयार किए जाते हैं, इसलिए ये लंबे समय तक खराब नहीं होते.

ऐसे बनती है नींबू की चटनी

पारस देवी ने बताया कि नींबू की चटनी बनाने के लिए सबसे पहले नींबू के बीज निकालकर उसे छिलके सहित तीन से चार बार ग्राइंड किया जाता है. इसके बाद उसमें शक्कर, जायफल सहित घर पर बने सीक्रेट मसाले मिलाए जाते हैं. फिर इसे 10 से 15 दिन तक ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, ताकि शक्कर नींबू में अच्छे से घुल जाए. इसके बाद पैकिंग की जाती है. कीमत की बात करें तो नींबू की चटनी 120 रुपए प्रति 500 ग्राम में उपलब्ध है.

महिलाओं को मिला रोजगार

पारस देवी ने बताया कि अब उनके साथ 10 से 15 महिलाएं भी काम कर रही हैं, जिन्हें इस बिजनेस से रोजगार मिला है. उनके खजूर और नींबू की चटनी की डिमांड जयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और गुजरात के सूरत तक है. इस तरह पारस देवी न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *