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Brahmi Benefits: ब्राह्मी का सबसे बड़ा गुण दिमाग की कोशिकाओं को मजबूत करना है. इसका नियमित सेवन मेमोरी बढ़ाने, एकाग्रता बनाए रखने और मानसिक तनाव को कम करने में मददगार माना जाता है.
सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. इनमें से कुछ पौधे अब धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर हैं. इन्हीं में एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है ब्राह्मी बूटी, जिसे आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है. ब्राह्मी न केवल मस्तिष्क को तेज और शांत करने में सहायक है बल्कि पेट और पाचन तंत्र की बीमारियों में भी रामबाण औषधि मानी जाती है. ब्राह्मी बूटी का वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है. यह एक रेंगने वाला और मुलायम तने का पौधा होता है, जो अधिकतर नम और जलयुक्त स्थानों पर उगता है. इसके फूल सफेद और हल्के बैंगनी रंग के होते हैं. आयुर्वेदिक ग्रंथों में ब्राह्मी को सदियों से मेधा वर्धक यानी बुद्धि और स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली औषधि बताया गया है.
ब्राह्मी का सबसे बड़ा गुण मस्तिष्क की कोशिकाओं को मजबूत करना है. इसका नियमित सेवन याददाश्त बढ़ाने, एकाग्रता बनाए रखने और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक माना जाता है. ब्राह्मी से बना तेल बालों को काला और मजबूत करने के साथ-साथ दिमाग को शांत करता है. अनिद्रा, चिंता और तनाव जैसी समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी बताया गया है. विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा और मानसिक श्रम करने वाले लोगों के लिए यह पौधा किसी वरदान से कम नहीं है.
सीधी के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि ब्राह्मी बूटी केवल मस्तिष्क ही नहीं बल्कि पेट और पाचन तंत्र के लिए भी अत्यंत उपयोगी है. यह पाचन शक्ति को मजबूत करती है, रक्त को शुद्ध करने और मोटापा कम करने में सहायक है. पेट के रोग, गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में भी ब्राह्मी का प्रयोग लाभ देता है. उन्होंने बताया कि असली ब्राह्मी बूटी अब बहुत कम देखने को मिलती है, इसलिए इसके संरक्षण और लोगों तक सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.
आंगन में आसानी से उगाएं ब्राह्मी
डॉ सिंह के अनुसार, ब्राह्मी का पौधा घर के आंगन या किचन गार्डन में आसानी से उगाया जा सकता है. रोजाना इसकी दो पत्तियां चाय, दूध, दही या सब्जी में मिलाकर सेवन किया जा सकता है. स्वाद में हल्की होने के बावजूद इसकी औषधीय उपयोगिता अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्राचीन काल से आधुनिक समय तक भारत में ब्राह्मी का प्रयोग लगातार होता आया है. आधुनिक शोध भी इसकी पुष्टि करते हैं कि यह तनाव, डिप्रेशन और पेट संबंधी बीमारियों में लाभकारी है. ब्राह्मी बूटी केवल एक पौधा नहीं बल्कि प्रकृति की अमूल्य औषधि है, जिसे अपनाकर हम स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.