Thyroid Symptoms & Treatment: थायराइड हमारे शरीर की एक ग्रंथि होती है, जो गले में तितली जैसी होती है. यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन बनाकर शरीर के मेटाबॉलिज्म, एनर्जी लेवल, वजन, दिल की धड़कन और हार्मोनल संतुलन को कंट्रोल करती है. जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो यह समस्या बन जाती है. जब यह ग्लैंड जरूरत से कम हार्मोन बनाती है, तब हाइपोथायरायडिज्म की समस्या पैदा हो जाती है. जब जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है, तब हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है. ये दोनों की कंडीशन लोगों के लिए परेशानियां पैदा कर देती हैं.
नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अनुपम बिस्वास ने News18 को बताया कि देश में थायरायड के मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है. आज स्थिति यह है कि लगभग हर 10 में से 1 वयस्क को थायराइड की बीमारी है. खासतौर पर महिलाएं इसकी चपेट में ज्यादा आ रही हैं. खराब लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव, ऑटोइम्यून बीमारियां और पोषण की कमी इसकी बड़ी वजह हैं. यह पूरी तरह लाइफस्टाइल डिजीज नहीं है, लेकिन गलत रुटीन इसके असर को जरूर बढ़ा देता है. महिलाओं में थायरायड की परेशानी पुरुषों की तुलना में 5 से 8 गुना ज्यादा रिपोर्ट की जाती है. इसका मुख्य कारण महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और ऑटोइम्यून बीमारियों का ज्यादा रिस्क है. गर्भावस्था, पीरियड्स और मेनोपॉज जैसी कंडीशन में हार्मोन में होने वाले बदलाव थायरायड को असंतुलित कर सकते हैं.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉक्टर ने बताया कि थायरायड की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लगातार थकान महसूस होना, बिना कारण वजन बढ़ना या घटना, बालों का झड़ना, त्वचा का रूखापन और मूड स्विंग्स जैसे लक्षण थायराइड से जुड़े होते हैं. हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ना और सुस्ती जैसे लक्षण ज्यादा दिखते हैं, जबकि हाइपरथायरायडिज्म में वजन तेजी से घटना, घबराहट और दिल की धड़कन तेज हो जाती है. आजकल बच्चे और युवा भी थायरायड की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनकी ग्रोथ, प्यूबर्टी और पढ़ाई तक प्रभावित हो सकती है. स्ट्रेस सीधेतौर पर थायरायड का कारण नहीं बनता है, लेकिन यह ऑटोइम्यून थायरायड को जरूर बढ़ा सकता है.
क्या है थायराइड का ट्रीटमेंट?
नई दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. संजय गुप्ता ने News18 को बताया कि थायरायड हर मामले में पूरी तरह ठीक हो जाए, यह जरूरी नहीं है. हालांकि ज्यादातर केस में इसे लंबे समय तक कंट्रोल किया जा सकता है. कुछ मरीजों में थायरायड अस्थायी होता है, जबकि अधिकतर को नियमित दवा और फॉलो-अप की जरूरत पड़ती है. सही इलाज के लिए ब्लड टेस्ट और जरूरी स्कैन से इसकी सटीक पहचान बेहद जरूरी है. हाइपोथायरायडिज्म का इलाज रोज एक बार ली जाने वाली दवा से आसानी से हो जाता है, जबकि हाइपरथायरायडिज्म में दवा, रेडियोआयोडीन या कुछ मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. सही इलाज और नियमित जांच से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है.