आयुर्वेद में 6 रस का जिक्र…भोजन में करें शामिल, भूल जाएंगे विटामिन गोलियां

बिलासपुर. आज के समय में विटामिन और मिनरल्स की कमी को दूर करने के लिए लोग तरह-तरह की गोलियों का सहारा ले रहे हैं लेकिन आयुर्वेद इस सोच से अलग रास्ता दिखाता है. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज भगत के अनुसार, शरीर में किसी भी प्रकार के विटामिन या मिनरल्स की पूर्ति दवाइयों से नहीं बल्कि संतुलित और सही आहार से होती है. आयुर्वेद में विटामिन की गोलियों का उल्लेख नहीं मिलता बल्कि भोजन को ही औषधि माना गया है. यदि हम अपने रोजमर्रा के खानपान में आयुर्वेद के बताए 6 रसों को शामिल करें, तो शरीर स्वतः स्वस्थ और ऊर्जावान बना रह सकता है.

डॉक्टर मनोज भगत बताते हैं कि गलत खानपान, एकतरफा भोजन और फास्टफूड की आदत के कारण शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसी वजह से लोग कमजोरी, थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी महसूस करते हैं और सीधे सप्लीमेंट्स की ओर बढ़ जाते हैं जबकि आयुर्वेद संतुलित आहार को ही इसका स्थायी समाधान मानता है.

आयुर्वेद के अनुसार आहार के 6 रस
उन्होंने आगे बताया कि आयुर्वेद में आहार को 6 प्रमुख रसों (स्वादों) में बांटा गया है, जिनका शरीर और मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है.
मधुर (मीठा): शक्कर, शहद, दूध, चावल, पके फल.
अम्ल (खट्टा): नींबू, दही, इमली, सिरका.
लवण (नमकीन): सेंधा नमक, काला नमक, समुद्री नमक.
कटु (तीखा): मिर्च, अदरक, लहसुन, प्याज.
तिक्त (कड़वा): नीम, करेला, मेथी.
कषाय (कसैला): कच्चा केला, दालें, पत्तेदार सब्जियां.

6 रसों का संतुलन क्यों है जरूरी?
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ शरीर के लिए इन सभी रसों का संतुलित सेवन अत्यंत आवश्यक है. किसी एक रस की अधिकता या कमी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकती है, जिससे बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है.

दोषों पर पड़ता सीधा असर
उन्होंने बताया कि हर रस का वात, पित्त और कफ दोषों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है. मधुर रस वात और पित्त को शांत करता है लेकिन कफ बढ़ा सकता है. कटु रस कफ को कम करता है लेकिन वात और पित्त को बढ़ा सकता है. इसी तरह सभी रस अपने-अपने तरीके से शरीर के संतुलन को प्रभावित करते हैं.

पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार
डॉक्टर मनोज भगत के अनुसार, जब आहार में सभी 6 रस सही मात्रा में होते हैं, तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इससे न केवल विटामिन और मिनरल्स की कमी दूर होती है बल्कि व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ भी रहता है. आयुर्वेद हमें सिखाता है कि दवाइयों से ज्यादा जरूरी है सही और संतुलित भोजन. यदि हम अपने रोजमर्रा के आहार में 6 रसों का ध्यान रखें, तो विटामिन की गोलियों की जरूरत अपने आप कम हो सकती है और शरीर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ बना रह सकता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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