गया. गया के बोधगया भागलपुर गांव के रहने वाले रंजन कुमार पहले एक अच्छी कंपनी में 45 हजार रुपए की सैलरी पर नौकरी कर रहे थे. उन्होंने वह नौकरी छोड़कर अपने पिता के काम में हाथ बंटाया और उसे नए आइडिया के साथ नए रूप में शुरू किया. आज वह महीने का 60 से 70 हजार रुपए की आमदनी कर रहे हैं. रंजन के पिता बोधगया में सालों से बेल और अन्य फलों का जूस बेचने का काम करते थे, लेकिन रंजन के एक आइडिया ने इस बिजनेस को नया आयाम दे दिया.
थाईलैंड गए, वहां से मिला आइडिया
दरअसल, रंजन 2014 में थाईलैंड घूमने गए थे. वहां उन्होंने एप्पल वुड यानी बेल को स्लाइस के रूप में बाजारों में बिकते देखा. वहां के लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली कि बेल को स्लाइस में काटकर सुखाया जाता है और उससे चाय बनाई जाती है, जो काफी फायदेमंद होती है.
खासकर पेट की बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए यह चाय बहुत लाभदायक मानी जाती है. उसी आइडिया को रंजन ने थाईलैंड से सीखकर बोधगया में शुरू किया. चूंकि उनके पिता का व्यवसाय पहले से ही बेल का जूस बेचने का था, इसलिए इस काम को शुरू करने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई.
बाजारों में बेचना शुरू किया
रंजन को आसानी से बेल का फल मिलने लगा और उन्होंने इसे स्लाइस के रूप में काटकर बोधगया के बाजारों में बेचना शुरू किया. आज उनका कारोबार काफी बढ़िया चल रहा है और ठंड के मौसम में बोधगया घूमने आने वाले देसी और विदेशी पर्यटक बेल के इन स्लाइस को खूब खरीद रहे हैं.
यहां तक कि अब कई देशों से भी इनके पास ऑर्डर आने लगे हैं. हाल ही में तिब्बत, नेपाल और भूटान जैसे देशों से बेल टी की बड़े पैमाने पर डिमांड आई है. इसकी कीमत बाजार में 400 रुपए से लेकर 800 रुपए किलो तक होती है.
दिन पर दिन बढ़ रही आमदनी
रंजन का यह व्यवसाय लोगों को काफी पसंद आ रहा है और उनकी आमदनी भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. साल के 3 महीने वह बेल टी बेचते हैं, जबकि बाकी महीनों में बेल का जूस बेचते हैं. इस व्यवसाय से रंजन हर महीने 60 से 70 हजार रुपए की आमदनी कर रहे हैं. बता दें कि रंजन ने मगध विश्वविद्यालय से स्पेनिश भाषा में डिप्लोमा की पढ़ाई की है.
पढ़ाई के बाद उन्हें टीसीएस कंपनी में अच्छी सैलरी पर नौकरी भी मिली और लगभग 2 साल तक काम करने के बाद उन्होंने वह नौकरी छोड़कर अपने पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाने का फैसला किया. आज दोनों मिलकर इस काम को आगे बढ़ाने में जुटे हैं.
थकान दूर कर, शरीर को देती है फायदे
रंजन बेल के स्लाइस से चाय बनाकर लोगों को पिलाते हैं. गया के डूंगेश्वरी पहाड़ी पर भगवान बुद्ध के मंदिर में जाने वाले वीआईपी और अन्य श्रद्धालुओं का भी बेल चाय से स्वागत किया जाता है, ताकि सीढ़ियों की चढ़ाई के बाद आई थकान दूर हो सके.
बेल चाय काफी फायदेमंद होती है. जो लोग इसके फायदे जानते हैं, वे इसका सेवन जरूर करते हैं. इसे पीने से शरीर में गर्माहट आती है, सूजन में राहत मिलती है, पैरों को आराम मिलता है और थकान भी कम होती है.
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