Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की मझौली तहसील में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये का महाघोटाला सामने आया है. वृहताकार सेवा सहकारी संस्था द्वारा संचालित श्रीजी वेयरहाउस में बिना एक दाना धान खरीदे ही कागजों पर 3 करोड़ 53 लाख की फर्जी खरीदी दिखाई गई. ई-उपार्जन पोर्टल पर 14,934 क्विंटल धान की एंट्री दर्ज की गई, लेकिन जांच में गोदाम में इतनी मात्रा में धान मौजूद ही नहीं पाया गया.
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की. टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो स्टॉक और पोर्टल रिकॉर्ड में भारी अंतर सामने आया. कई बोरियों का वजन मानक से कम था, और उन पर किसान कोड या अनिवार्य स्टेंसिल तक नहीं थे. धान खरीदी का कार्य अंतिम दौर में है, लेकिन बिचौलियों और केंद्र प्रभारियों की सांठगांठ से फर्जीवाड़ा चरम पर पहुंच गया है.
किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री
इस मामले में 174 किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री की गई, जिससे करोड़ों की हेराफेरी का प्रयास किया गया. जांच के दौरान केंद्र प्रभारी रत्नेश भट्ट और कंप्यूटर ऑपरेटर अमन सेन ने अपराध स्वीकार कर लिया. उन्होंने पोर्टल से रिकॉर्ड डिलीट करने की कोशिश भी की, लेकिन जांच टीम ने इसे पकड़ लिया. कलेक्टर दीपक सक्सेना के आदेश पर खाद्य विभाग के अधिकारियों ने मझौली थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई. दोनों आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं.
नहीं हुआ था पेमेंट
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “केंद्र प्रभारी और ऑपरेटर ने सांठगांठ से धान की हेराफेरी की. हालांकि, इस फर्जी धान का पेमेंट नहीं किया गया था, इसलिए शासन को कोई आर्थिक क्षति नहीं हुई है. हम सभी खरीदी केंद्रों पर सख्त निगरानी कर रहे हैं, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.” वहीं, ASP सूर्यकांत शर्मा ने बताया, “मामला पुलिस के पास है, हम जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार करेंगे. ऐसे घोटालों में बिचौलियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.”
धान खरीदी प्रक्रिया पर सवाल
यह घोटाला जिले में धान खरीदी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है. किसानों का कहना है कि असली किसान तो धान बेचने के लिए लाइन में लगते हैं, लेकिन बिचौलिए फर्जी एंट्री से लाभ उठा रहे हैं. संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन की अध्यक्षता वाली जांच टीम ने रिपोर्ट में कहा कि पोर्टल पर दर्ज धान की मात्रा वास्तविक स्टॉक से मेल नहीं खाती. कई बोरियां पुरानी या खाली थीं, जो घोटाले की पुष्टि करती हैं.
धान खरीदी योजना का उद्देश्य किसानों को समर्थन मूल्य पर लाभ पहुंचाना है, लेकिन ऐसे घोटालों से योजना की साख प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ई-उपार्जन पोर्टल पर सख्त मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जरूरत है. इस घटना ने स्थानीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है.
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