Last Updated:
Lal Rajma Health Benefits : हिमालय की गोद में ऐसे-ऐसे रत्न छिपे हैं जो शुद्धता में सोना सरीखा है, वहीं इस गोद में उगने वाली चीजें सेहत के लिए बेमिसाल फायदे देने वाली होती है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद स्थित मुनस्यारी क्षेत्र में उगाई जाने वाली लाल राजमा इसी तरह का अनाज है जो आज अपनी विशिष्ट गुणवत्ता के कारण देश ही नहीं दुनिया भर में पहचान बना रही है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद स्थित मुनस्यारी क्षेत्र में उगाई जाने वाली लाल राजमा लगभग 7,200 फीट की ऊंचाई पर हिमालय की गोद में तैयार होती है. इस ऊंचाई पर ठंडा मौसम, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक जल स्रोत राजमा की गुणवत्ता को असाधारण बनाते हैं. दिन और रात के तापमान में अंतर के कारण दाने धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिससे उनमें प्राकृतिक मिठास और गाढ़ापन आता है. यही वजह है कि मुनस्यारी की लाल राजमा सब्जी अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्वाद में अधिक समृद्ध और बनावट में बेहद मलाईदार मानी जाती है. इसी तरह यह सेहत के लिए भी लाजवाब होती है.

मुनस्यारी का लाल राजमा अपने गहरे लाल रंग के कारण पहली नजर में ही अलग पहचान बना लेती है. पकने के बाद इसके दाने फटते नहीं हैं और आकार में भी एकसार रहते हैं. इसमें हल्की प्राकृतिक मिठास होती है, जो मसालों के साथ मिलकर राजमा करी का स्वाद दोगुना कर देती है. पहाड़ी मिट्टी में मौजूद खनिज तत्व इसके स्वाद को और निखारते हैं. यही कारण है कि एक बार खाने के बाद लोग बार-बार इसी राजमा की मांग करते हैं.

मुनस्यारी की लाल राजमा पूरी तरह जैविक तरीके से उगाई जाती है. इसकी खेती में न तो रासायनिक खाद का उपयोग होता है और न ही कीटनाशकों का. किसान पारंपरिक बीज, गोबर खाद और प्राकृतिक तरीकों से फसल तैयार करते हैं. इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ भी मिलता है. आज के समय में जब लोग केमिकल युक्त भोजन से दूरी बना रहे हैं, तब यह राजमा सेहतमंद विकल्प बनकर उभर रही है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

एक्सपर्ट के मुताबिक यह लाल राजमा पोषण के लिहाज से बेहद समृद्ध मानी जाती है. इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों के विकास और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी हैं. इसके अलावा इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कार्बोहाइड्रेट भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं. शाकाहारी लोगों के लिए यह प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है. नियमित सेवन से ऊर्जा मिलती है, और शरीर लंबे समय तक सक्रिय बना रहता है.

मुनस्यारी की लाल राजमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आसानी से भीग जाती है, और कम समय में मुलायम हो जाती है. कई मामलों में इसे प्रेशर कुकर के बिना भी आराम से पकाया जा सकता है. पकने के बाद दाने इतने नरम हो जाते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. यही वजह है कि होटल, ढाबे और घरों में इसे खास तौर पर पसंद किया जाता है, क्योंकि इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है.

मुनस्यारी क्षेत्र में लाल राजमा की खेती से लेकर कटाई, सुखाने और पैकेजिंग तक में स्थानीय महिला किसान अहम भूमिका निभा रही हैं. समूहों में काम कर महिलाएं न केवल गुणवत्ता पर नजर रखती हैं, बल्कि अपने परिवार की आय में भी योगदान देती हैं. इससे ग्रामीण महिलाओं को घर के पास ही रोजगार मिल रहा है, और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं. यह राजमा महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की भी कहानी कहती है.

मुनस्यारी की लाल राजमा अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच रही है. इसकी शुद्धता और स्वाद के कारण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है. बागेश्वर में यह राजमा सरस मार्केट में 350 से 400 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध है. पर्यटक भी इसे पहाड़ी स्वाद की याद के रूप में अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं, जिससे इसकी ब्रांड वैल्यू और मजबूत हो रही है.

मुनस्यारी की लाल राजमा आज केवल एक खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर पहाड़ की पहचान बनती जा रही है. यह फसल स्थानीय किसानों को बेहतर आमदनी दे रही है, और पलायन को रोकने में भी सहायक साबित हो रही है. पारंपरिक खेती, जैविक सोच और स्थानीय सहभागिता ने इसे सफलता की कहानी बना दिया है. स्वाद, सेहत और शुद्धता का यह अनोखा संगम आने वाले समय में उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पादों को नई पहचान देने में अहम भूमिका निभाएगा.