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Grow Ajwain plant at home Tips: घर के किचन गार्डन में पत्तियों वाली अजवाइन उगाना आसान और लाभकारी है. यह पौधा कम जगह में भी हरा-भरा रहता है, पत्तियां स्वास्थ्य और पाचन के लिए फायदेमंद होती हैं. सही मिट्टी, हल्की धूप और नियमित हल्की सिंचाई से ताजी पत्तियां सालभर मिलती हैं.
रोहतास जिले के शिवपुर गांव में किसान स्यंदन सुमन ने ‘पत्तियों वाली अजवाइन’ की खेती शुरू की है. यह पौधा पारंपरिक अजवाइन के दानों की बजाय पत्तियों के लिए उगाया जाता है और आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है. इसे किचन गार्डन में उगाने से घर का बगीचा हरा-भरा दिखता है और ताजी पत्तियाँ हमेशा उपलब्ध रहती हैं.

पत्तियों वाली अजवाइन कम जगह में उग सकती है इसलिए यह किचन गार्डन के लिए आदर्श है. स्यंदन सुमन बताते हैं कि हल्की धूप, सही मिट्टी और संतुलित नमी मिलने पर यह पौधा तेजी से बढ़ता है और लंबे समय तक हरा-भरा रहता है. छोटे और मीडियम साइज के गमले इसकी जड़ों को मजबूत बनाए रखते हैं और देखभाल आसान होती है.

स्यंदन सुमन गमलों में अजवाइन उगाने के लिए 40% गार्डन मिट्टी, 30% वर्मीकम्पोस्ट, 10% नीम फर्टिलाइजर और 20% रेत का मिश्रण तैयार करते हैं. यह मिश्रण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व देता है, पानी की निकासी बेहतर करता है और जड़ सड़न जैसी समस्याओं से बचाता है.
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पत्तियों वाली अजवाइन को कटिंग से उगाना सबसे तेज और आसान तरीका है. स्यंदन सुमन कटिंग को तैयार मिट्टी में लगाते हैं और हल्का पानी छिड़कते हैं. कुछ ही दिनों में नई जड़ें निकलने लगती हैं जिससे किचन गार्डन में पौधों की ताजगी और घनत्व बढ़ता है.

अजवाइन को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती. बार-बार हल्की सिंचाई और हर 1-2 सप्ताह में तरल खाद देने से पौधा तेजी से बढ़ता है. स्यंदन सुमन बताते हैं कि इससे पत्तियां मोटी, हरी और खुशबूदार होती हैं और किचन गार्डन हमेशा हरा-भरा दिखाई देता है.

अजवाइन की पत्तियां आयुर्वेद में औषधि के रूप में प्रयोग होती हैं. पाचन सुधार, सर्दी-जुकाम में राहत, हृदय स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने में पत्तियां लाभकारी हैं. स्यंदन सुमन इन्हें किचन गार्डन से ताजगी के साथ निकालकर चटनी, सलाद और काढ़े में इस्तेमाल करते हैं.

अजवाइन के दानों की तरह पत्तियों का उपयोग कम लोग करते हैं लेकिन स्यंदन सुमन ने इसे किचन गार्डन में उगा कर घरेलू उपयोग और बाजार में आय दोनों बनाई. उनकी पहल से शिवपुर गांव के अन्य किसान भी नई किस्म की खेती, किचन गार्डन और स्वास्थ्य लाभ की ओर प्रेरित हो रहे हैं.
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