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दिल्ली के आकार से भी करीब 2.5 गुना बड़ा बर्फ का दावन टूट कर एक बड़ा खतरा बन चुका है. इस दानव के टुकड़े समुंदर की लहरों के साथ बह रहे हैं, जिसकी सैटेलाइट तस्वीरें देखकर वैज्ञानिकों के पसीने छूट गए हैं. ये हिमखंड 40 सालों का सफर खत्म करके डेथ मार्च करते हुए साउथ जॉर्जिया पहुंचा था, जहां इसके टुकड़े हो गए. आगे जानें इसकी वजह से दुनिया पर कौन सा बड़ा खतरा मंडराने लगा है, जो वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा है.
जेम्सटाउन: दुनिया भर में क्लाइमेट चेंज की खबरों ने डरावना माहौल बना दिया है. हाल ही में एक ऐसी ही खबर ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. दुनिया का सबसे बड़ा और खतरनाक आइसबर्ग A23a अचानक टूट गया है. ये बर्फ का दावन दिल्ली के क्षेत्रफल से भी ढाई गुना बड़ा है. इस दानव के टुकड़े टूट कर समुंदर में बह गए हैं और अब दक्षिण अटलांटिक महासागर की लहरों के बीच एक बड़ा खतरा पैदा हो गया है. आगे जानें इस बर्फीले दानव के टूटने और समुंदर में बहने की वजह से ऐसा कौन सा खतरा पैदा हो गया है कि वैज्ञानिकों पसीने छूट गए हैं.
कितना विशालकाय था ये ‘बर्फ का दावन’?
कहां जा रहा है हिमखंड A23a?
वैज्ञानिकों ने इसे ‘आइसबर्ग कब्रिस्तान’ की ओर बढ़ता हुआ पाया है, और जो तस्वीरें सामने आई हैं वे चौंकाने वाली हैं. सैटेलाइट तस्वीरों में इस आइसबर्ग पर चमकीले नीले रंग के तालाब दिखाई दे रहे हैं. जो पिघली हुई बर्फ का पानी है. जब ऊपर की बर्फ पिघलती है, तो वह दरारों में भर जाती है. इसकी वजह से हाइड्रोफ्रैक्चरिंग शुरू होती है यानी इस पानी का भारी दबाव बर्फ की विशाल चट्टानों को अंदर से फाड़ देता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नीला रंग इस बात का सबूत है कि यह मेगाबर्ग अब कुछ ही दिनों या हफ्तों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा.
40 साल का सफर अंत
1986 में यह हिमखंड अंटार्कटिका के फिल्चनर-रोन आइस शेल्फ से टूटा था. टूटने के तुरंत बाद यह समुद्र की तलहटी में फंस गया और दशकों तक एक जगह जमा रहा. 2020 में जलवायु परिवर्तन और समुद्री धाराओं के कारण यह फिर से तैरने लगा. 2025-26 में ये डेथ मार्च करता हुआ साउथ जॉर्जिया द्वीप के पास पहुंचा, जहां गर्म पानी और तेज हवाओं ने इसे टुकड़ों में तोड़ना शुरू कर दिया.
किस बात का है खतरा?
बताया जा रहा है कि इस हिमखंड के टूटने से समुद्र में हजारों छोटे-छोटे बर्फीले टुकड़े फैल गए हैं. इनमें से कुछ टुकड़े 1 किलोमीटर से भी बड़े हैं, जो समुद्र में चलने वाले जहाजों के लिए किसी काल से कम नहीं हैं. इसके अलावा इसके पिघलने से समुद्र के इकोसिस्टम भी गहरा असर पड़ सकता है.
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उत्कर्षा श्रीवास्तव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव प्राप्त है. वर्तमान में वे न्यूज18 डिजिटल में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अपने करियर के द…और पढ़ें
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