नागौर. मेथी दाना अक्सर एक साधारण मसाले के रूप में देखा जाता है, जबकि आयुर्वेद इसे शरीर के मेटाबॉलिक संतुलन को ठीक करने वाली एक प्रभावशाली औषधि मानता है. आधुनिक विज्ञान भी आज इस बात की पुष्टि करता है कि मेथी दाना शरीर की अग्नि, इंसुलिन और हार्मोनल व्यवस्था को संतुलन में लाने की अद्भुत क्षमता रखता है. यह केवल शुगर या पीसीओएस की दवा नहीं है, बल्कि पूरे शरीर को भीतर से ठीक करने का एक प्राकृतिक उपाय है.
मेथी दाना में पाया जाने वाला गैलेक्टोमैनन एक घुलनशील रेशा है, जो ग्लूकोज़ को रक्त में धीरे-धीरे प्रवेश करने देता है. इसका सीधा लाभ यह होता है कि रक्त शर्करा अचानक नहीं बढ़ती, इंसुलिन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है. जब इंसुलिन संतुलन में आता है, तो हार्मोनल असंतुलन अपने-आप सुधरने लगता है, यही कारण है कि मेथी दाना मधुमेह और पीसीओएस दोनों में लाभकारी मानी जाती है.
भिगोई हुई मेथी दाना क्यों अधिक प्रभावी है
सूखी मेथी दाना में एक तत्व होता है जिसे फाइटिक एसिड कहा जाता है, जो शरीर में खनिजों के अवशोषण को रोकता है. जब मेथी दाना को रातभर पानी में भिगो दिया जाता है, तो यह फाइटिक एसिड टूट जाता है और शरीर को आवश्यक खनिज मिलने लगते हैं, जैसे आयरन, मैग्नीशियम और ज़िंक. ये खनिज अंडाशय, थायरॉयड ग्रंथि, त्वचा, बाल और हार्मोनल तंत्र की बुनियाद हैं, इसीलिए भिगोई हुई मेथी दाना केवल शुगर ही नहीं, बल्कि पूरे हार्मोनल स्वास्थ्य को पोषण देती है.
आमतौर पर पेट फूलना, वजन बढ़ना, पानी का जमाव, थकान, सुस्ती, जोड़ों में जकड़न, अनियमित माहवारी या शुगर ये अलग-अलग बीमारियां नहीं हैं. आयुर्वेद के अनुसार ये सभी एक ही मूल कारण से जुड़ी होती हैं, जिसे कहा जाता है मंद अग्नि और आम (विषैले तत्वों का जमाव). आयुर्वेद के अनुसार मेथी दाना अग्नि को प्रज्वलित करती है, कफ और जमाव को हटाती है, सूजन और भारीपन को कम करती है और पाचन शक्ति को सुधारती है. जब पाचन और अग्नि सुधरती है, तो हार्मोन अपने-आप संतुलन में आने लगते हैं.
मेथी दाना में पाए जाने वाले सैपोनिन्स यकृत यानी लीवर की विषहरण क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे शरीर में जमा हुआ पुराना एस्ट्रोजन बाहर निकलने लगता है, फैटी लीवर की समस्या घटती है और हार्मोनल गड़बड़ी में सुधार आता है. पीसीओएस की जड़ अक्सर यहीं छुपी होती है. जब लीवर साफ होता है, तो हार्मोन स्वतः संतुलित होने लगते हैं.
मेथी दाना सेवन की सही विधि
वैघ रामपाल यादव के अनुसार, रात को एक चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगो दें. सुबह खाली पेट वही पानी पिएं और मेथी दानों को अच्छी तरह चबाकर खाएं. यह सरल-सा उपाय इंसुलिन को स्थिर रखता है, पीसीओएस में हार्मोन संतुलन बनाता है, पेट फूलना और सूजन कम करता है, और दिनभर की अग्नि को सक्रिय रखता है. आयुर्वेद कहता है कि औषधि तभी पूर्ण प्रभाव दिखाती है, जब अग्नि, आहार और अनुशासन साथ-साथ चलें. मेथी दाना शरीर को किसी रोग से लड़ने के लिए मजबूर नहीं करती, बल्कि उसे स्वाभाविक संतुलन में लौटना सिखाती है. यही कारण है कि यह छोटी-सी बीज रूपी औषधि बड़े-बड़े रोगों की जड़ पर काम करती है.