बैतूल के भौंरा क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से दहशत फैला रहे तेंदुए को सोमवार शाम 4:45 बजे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) की विशेष टीम ने ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया। पिंजरे में कैद करने के बाद टीम उसे लेकर भोपाल के वन विहार के लिए रवाना हो गई है। अब इस तेंदुए को वहीं एक सीमित क्षेत्र में रखा जाएगा। यह कार्रवाई तेंदुए द्वारा एक बच्चे पर जानलेवा हमला करने के बाद की गई। यह तेंदुआ भौंरा क्षेत्र में लगातार उत्पात मचा रहा था। 17 जनवरी की शाम करीब 7 बजे इसने 4 वर्षीय बच्चे आर्यन उईके पर अचानक हमला कर दिया था। हमले में आर्यन की गर्दन और पीठ पर गहरे घाव हो गए थे। परिजनों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत के चलते उसे भोपाल रेफर किया गया। बच्चे का इलाज अभी जारी है। हाथियों की मदद से तीसरे प्रयास में पकड़ा घटना के बाद वन विभाग ने एसटीआर की विशेष टीम, वन अमले और डॉक्टरों के साथ मिलकर संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया था। दो बार के असफल प्रयासों के बाद, तीसरे प्रयास में प्रशिक्षित हाथियों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित पकड़ा जा सका। 7 महीने में 4 बार जंगल छोड़ा, हर बार वापस आया सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक विनोद वर्मा ने बताया कि यह वही तेंदुआ है, जिसे जून 2025 में एसटीआर टीम ने मटकुली के सिंगानामा क्षेत्र से रेस्क्यू कर चूरना में छोड़ा था। उस समय यह शावक था, लेकिन जंगल में खुद को स्थापित नहीं कर पाया। पिछले 7 महीनों में इसे चार बार घने जंगल में छोड़ा गया, ताकि यह वापस न आ सके। लेकिन यह बार-बार कोर क्षेत्र से भागकर कभी तवा बफर तो कभी केसला के ग्रामीण इलाकों में पहुंच जाता था। गले में लगी थी कॉलर आईडी अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए की मॉनिटरिंग के लिए कॉलर आईडी भी लगाई गई थी। वह पिछले चार-पांच महीनों से रिहायशी इलाकों के आसपास भटक रहा था। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने कहा, “भौंरा क्षेत्र में तेंदुए की दहशत थी। उसे टीम ने पकड़ा है। तेंदुए के गले में कॉलर आईडी लगी थी। कुछ दिन पहले बच्चे पर तेंदुआ ने हमला किया। तेंदुए को अब भोपाल वन विहार में रखेंगे।” .