Hyunmoo-5: 8000 KG वारहेड और पाताल तक तबाही, बिना परमाणु प्रलय लाएगा द. कोरिया

कोरियाई प्रायद्वीप के आसमान में अब एक ऐसी ‘मौत’ मंडरा रही है जिसकी धमक पाताल की गहराई तक महसूस की जाएगी. दक्षिण कोरिया ने अपनी सैन्य शक्ति का सबसे खौफनाक चेहरा दिखाते हुए ‘ह्यूनमू-5’ मिसाइल की तैनाती शुरू कर दी है. यह कोई साधारण मिसाइल नहीं है बल्कि 8,000 किलो (8 टन) वजनी दुनिया का सबसे भारी पारंपरिक वारहेड ले जाने वाला एक चलता-फिरता प्रलय है. दक्षिण कोरिया के पास परमाणु हथियार नहीं हैं लेकिन उसकी यह ‘मॉन्स्टर मिसाइल’ बिना किसी रेडियोएक्टिव रेडिएशन के परमाणु बम जैसी तबाही मचाने की ताकत रखती है. इस हथियार को खासतौर पर उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन के उन गुप्त बंकरों को धुआं-धुआं करने के लिए बनाया गया है, जिन्हें अभेद्य माना जाता था. सियोल ने साफ संदेश दे दिया है कि अगर प्योंगयांग से कोई हिमाकत हुई तो धरती के नीचे छिपे तानाशाह के ठिकानों को भी यह मिसाइल कब्रिस्तान बना देगी. इस तैनाती ने न केवल उत्तर कोरिया बल्कि पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन को हिलाकर रख दिया है.

दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते तनाव के बीच सियोल ने अपनी सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है. यह मिसाइल विशेष रूप से उत्तर कोरिया के उन भूमिगत बंकरों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है, जहां उनके नेतृत्व और मिसाइल कंट्रोल सेंटर छिपे हो सकते हैं. राष्ट्रपति ली जे म्योंग के प्रशासन के तहत साल 2030 तक इसकी पूरी यूनिट तैनात कर दी जाएगी. चूंकि दक्षिण कोरिया परमाणु हथियार नहीं रख सकता इसलिए उसने पारंपरिक हथियारों में ही परमाणु जैसी ताकत पैदा करने के लिए इस ‘राक्षसी’ मिसाइल का निर्माण किया है.

ह्यूनमू-5 की खासियत और क्षमताएं
· विशालकाय आकार: इस मिसाइल की लंबाई लगभग 65 फीट है.

· दुनिया का सबसे भारी वारहेड: यह 8 टन (8000 किलो) का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है.1

· बंकर ब्लास्टर: यह मिसाइल जमीन की गहराई में धंसकर कंक्रीट के बंकरों को भाप बना देती है.

· रेंज: इसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 5,000 किलोमीटर तक विस्तारित की जा सकती है.

· सटीकता: सियोल का दावा है कि यह ‘अल्ट्रा-प्रिसिजन’ तकनीक से लैस है यानी बिल्कुल सटीक निशाना.

· कोल्ड लॉन्च सिस्टम: यह मिसाइल लॉन्च पैड को नुकसान पहुंचाए बिना ठंडी हवा के दबाव से लॉन्च होती है.

कब बनी और कितनी है कीमत?
Hyunmoo-5 का विकास 2021 में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच मिसाइल प्रतिबंध हटने के बाद तेजी से शुरू हुआ. इसका पहला सफल परीक्षण 2023-24 के दौरान किया गया और अक्टूबर 2025 में इसके मास-प्रोडक्शन (बड़े पैमाने पर उत्पादन) की पुष्टि हुई. हालांकि एक मिसाइल की सटीक कीमत गोपनीय रखी गई है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके रिसर्च और उत्पादन पर अरबों डॉलर खर्च किए गए हैं. दक्षिण कोरिया ऐसी सैकड़ों मिसाइलें तैयार करने की योजना बना रहा है.

किसके खिलाफ होगा इस्तेमाल?
इसका मुख्य उद्देश्य उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को ‘प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक’ (हमले से पहले हमला) के जरिए नष्ट करना है. यदि उत्तर कोरिया हमला करता है तो दक्षिण कोरिया इस मिसाइल का उपयोग ‘रिटैलिएटरी स्ट्राइक’ यानी जवाबी हमले के लिए करेगा. यह विशेष रूप से प्योंगयांग के नेतृत्व को खत्म करने के लिए डिजाइन की गई है.

ह्यूनमू-5 से जुड़े 5 मुख्य सवाल
1. इसे “मॉन्स्टर मिसाइल” क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह दुनिया की एकमात्र पारंपरिक मिसाइल है जो 8 टन वजनी वारहेड ले जा सकती है. इतनी ताकत आमतौर पर केवल परमाणु मिसाइलों में होती है.

2. दक्षिण कोरिया ने इसे क्यों तैनात किया है?
उत्तर कोरिया के परमाणु खतरों का मुकाबला करने और उसके मजबूत भूमिगत बंकरों को नष्ट करने के लिए इसे तैनात किया गया है.

3. क्या यह परमाणु हथियार ले जा सकती है?
नहीं, यह एक पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल है. दक्षिण कोरिया परमाणु प्रसार निषेध संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार नहीं बना सकता.

4. इस मिसाइल की तैनाती कब तक पूरी होगी?
इसकी तैनाती 2024 के अंत में शुरू हुई है और 2030 तक पूरी तरह से सेना का हिस्सा बन जाएगी.

5. क्या इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ बढ़ेगी?
जी हां, विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण कोरिया के इस कदम से चीन और जापान भी अपनी मिसाइल क्षमताएं बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकते हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *