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Shivpuri News: शिवपुरी के ग्राम खिरिया में तूरसा को एंबुलेंस न मिलने पर ट्रैक्टर-ट्रॉली में अस्पताल ले जाया गया, रास्ते में बच्ची का जन्म हुआ. जच्चा-बच्चा सुरक्षित, व्यवस्था पर सवाल.
Shivpuri News: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. सुरक्षित प्रसव और समय पर इलाज की बात करने वाली सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था उस समय बेबस नजर आई, जब एक गर्भवती को एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली में अस्पताल ले जाना पड़ा और रास्ते में ही उसने बच्ची को जन्म दे दिया. यह मामला बदरवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खिरिया का बताया जा रहा है.
गांव की 24 वर्षीय महिला तूरसा पत्नी निलेश कुशवाह को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. दर्द बढ़ता देख परिवार वालों ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन मदद के नाम पर उन्हें सिर्फ इंतजार करने को कहा गया. परिजनों का आरोप है कि उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि करीब पांच बार एंबुलेंस के लिए फोन किया. हर बार सामने से यही जवाब मिला कि “अभी वाहन उपलब्ध नहीं है.” हैरानी की बात ये रही कि बाद में पता चला कि एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्र के पास ही खड़ी थी, इसके बावजूद उसे भेजने से मना किया गया.
मजबूरी उठाना पड़ा ये कदम
इधर महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी. दर्द इतना ज्यादा था कि इंतजार करना मुश्किल हो गया. मजबूरी में पति निलेश और परिवार वालों ने फैसला लिया कि महिला को ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही बदरवास सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाए. लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अस्पताल पहुंचने से पहले ही खुले आसमान के नीचे, ट्रॉली के अंदर महिला ने एक बच्ची को जन्म दे दिया. गांव वालों का कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो महिला को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाया जा सकता था. ट्रॉली में डिलीवरी होना न सिर्फ महिला के लिए खतरनाक था, बल्कि नवजात की जान भी जोखिम में पड़ गई थी. गनीमत रही कि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन सवाल यही है कि अगर कोई अनहोनी हो जाती तो जिम्मेदारी कौन लेता?
यह घटना प्रदेश सरकार के उन दावों की पोल खोलती है, जिनमें गांव-गांव तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की बात कही जाती है. खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए जननी एक्सप्रेस और 108 जैसी सेवाओं को मजबूत बताया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है. स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजों में सुविधाएं दिखा रहे हैं, जबकि जरूरत के वक्त मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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