एक इंजेक्शन से बची महिला के आंखों की रोशनी, रेयर आई डिजीज हाइपोटोनी पर आखिरकार डॉक्टर्स को मिली कामयाबी

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What Is Hypotony: आंखों में होने वाली दुर्लभ बीमारी पर डॉक्टरों ने सफलता हासिल कर ली है. एक पायलट स्टडी के अंतर्गत 8 मरीजों को एक आई इंजेक्शन लगाया गया जिसके बाद उनकी खत्म होती आंखों की रोशनी दोबारा लौट आयी.

हाइपोटोनी ये आंखों में होने वाली एक रेयर डिजीज है. इसके मामले ज्यादा नहीं आते हैं, लेकिन ये एक गंभीर बीमारी है जिसमें आंखों की रोशनी हमेशा के लिए पूरी तरह से खत्म हो सकती है. ये बीमारी उस समय होती है जब आंख का प्रेशर बहुत कम हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में इंट्राओकुलर प्रेशर कहा जाता है. इससे आंख सिकुड़ने लगती है.

लंदन के मूरफील्ड्स आई हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने आंखों की इसी बीमारी पर सफलता हासिल की है. मूरफील्ड्स हॉस्पिटल दुनिया का इकलौता सेंटर है, जहां इस बीमारी के लिए खास क्लिनिक बनाया गया है. एक पायलट स्टडी में आठ मरीजों को नया इलाज दिया गया, जिनमें से सात मरीजों की नजर में साफ सुधार हुआ.

सब कुछ धुंधला हो रहा था
इस इलाज से फायदा पाने वाली पहली मरीज 47 साल की महिला निक्की गाइ हैं. BBC से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह इलाज मेरे लिए जिंदगी बदलने वाला है. अब मैं अपने बच्चे को बड़ा होते देख सकती हूं. पहले मैं सिर्फ उंगलियां गिन पाती थी, सब कुछ धुंधला होता जा रहा था. हो सकता है निक्की कभी गाड़ी न चला पाएं लेकिन फिर वो इससे खुश हैं.पहले वह आंशिक रूप से दृष्टिहीन थीं, पास की चीजें देखने के लिए मैग्नीफाइंग ग्लास इस्तेमाल करना पड़ता था और घर के अंदर-बाहर याददाश्त के सहारे चलना पड़ता था.

हाइपोटोनी क्यों होती है?
यह बीमारी आंख के अंदर बनने वाले नेचुरल पानी के कम बनने से हो सकती है. यह चोट, सूजन, आंखों की सर्जरी या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट से भी हो सकती है. अगर इलाज न हो, तो व्यक्ति पूरी तरह ब्लाइंड हो सकता है.

पुराने इलाज की समस्या
पहले डॉक्टर आंख को “फुलाने” के लिए स्टेरॉयड और सिलिकॉन ऑयल का इस्तेमाल करते थे. लेकिन लंबे समय तक यह नुकसानदेह हो सकता है और नजर में ज्यादा सुधार नहीं आता. सिलिकॉन ऑयल के कारण चीजें धुंधली दिखती हैं.

नया इलाज क्या है?
डॉक्टरों ने एक अलग तरीका अपनाया.उन्होंने HPMC (हाइड्रॉक्सीप्रोपाइल मिथाइलसेलुलोज) नाम का एक साफ, पानी जैसा जेल इस्तेमाल किया. यह पहले से आंखों की कुछ सर्जरी में उपयोग होता था, लेकिन अब इसे आंख के अंदर इंजेक्ट करके थेरेपी के रूप में इस्तेमाल किया गया. निक्की के डॉक्टर, मिस्टर हैरी पेट्रुश्किन, कहते हैं कि यह फैसला आसान नहीं था. हमें डर था कि कहीं नुकसान न हो जाए, लेकिन नतीजे हमारी उम्मीद से कहीं बेहतर रहे. यह इलाज भविष्य में हाइपोटोनी से पीड़ित कई लोगों की रोशनी बचाने की नई उम्मीद बन सकता है.

About the Author

शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

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एक इंजेक्शन से बची महिला के आंखों की रोशनी

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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