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Bakuchi Plant Health Benefits: प्रकृति की अमूल्य देन बाकुची एक औषधीय पौधा है, जो जंगलों और खेतों में पाया जाता है. इसके पत्ते, बीज और तना औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में बाकुची का उपयोग त्वचा रोग, बालों की समस्या, पाचन विकार और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के उपचार में किया जाता है. आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई समस्याओं में यह प्राकृतिक औषधि प्रभावी मानी जाती है.
प्रकृति ने हमें कई अद्भुत पेड़ पौधे और वनस्पतियां दी है. इन्हीं में से एक है बाकूची का पौधा. यह पौधा आमतौर पर जंगलों और खेत खलिहानों में पाया जाता है. बाकूची एक छोटा पौधा है, इसमें छोटे-छोटे फूल और बीज लगते हैं. यह पौधा औषधि गुणों से भरपूर होता है. हालांकि अधिकतर लोग इसके फायदो से अनजान है. इस पौधे में मौजूद औषधीय तत्व कई गंभीर बीमारियों से बचाव करते हैं. यह हमारे स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक वरदान है. बाकुची की पत्तियां, बीज और तना औषधि गुणों से युक्त है.

आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती त्वचा समस्याएं, बालों का झड़ना, पाचन विकार और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता आज आम हो गई हैं. इन समस्याओं के समाधान में आयुर्वेदिक औषधि बाकुची बेहद उपयोगी मानी जाती है. बाकुची में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर करते हैं. यह त्वचा रोगों में लाभकारी है और बालों की सेहत सुधारने में मदद करती है. साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर कई गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक होती है. इसी कारण आयुर्वेद में बाकुची का विशेष महत्व है.

हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर महेश कुमार के अनुसार बाकुची त्वचा रोगों में बेहद लाभकारी औषधि है. बाकुची का सबसे बड़ा फायदा त्वचा से जुड़ी समस्याओं में देखा जाता है. यह सफेद दाग यानी विटिलिगो, सोरायसिस, एक्जिमा, खुजली और फंगल इंफेक्शन में प्रभावी मानी जाती है. इसके नियमित और सही उपयोग से त्वचा की रंगत में सुधार होता है. साथ ही यह नई त्वचा कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देती है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है. आयुर्वेद में इसे त्वचा के लिए अत्यंत उपयोगी माना गया है.
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यह बालों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. बाकुची रूसी को दूर करने, बालों की जड़ों को मजबूत करने और बालों के विकास को बढ़ाने में सहायक है. इसके नियमित उपयोग से बालों में चमक आती है और बाल झड़ना कम होता है. इसका सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. यह पाचन शक्ति को बढ़ाती है और पेट के कीड़े खत्म करने में सहायक होती है. साथ ही गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत देती है.

इसी के साथ यह लिवर और हड्डियों के लिए लाभकारी होता है. बाकुची लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करती है और हड्डियों को मजबूत बनाती है. आयुर्वेद में इसे हड्डियों की कमजोरी और ऑस्टियोपोरोसिस में उपयोगी माना गया है. इसके अलावा यह सूजन को कम करती है, मधुमेह में सहायक होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और एंटी-एजिंग गुणों के कारण त्वचा को जवान बनाए रखने में मदद करती है.

त्वचा रोगों के लिए बाकुची के बीजों का तेल प्रभावित स्थान पर हल्के हाथों से लगाएँ. इसी के साथ खांसी और कफ में आधा ग्राम बाकुची बीज का चूर्ण अदरक के रस के साथ दिन में 2 से 3 बार लिया जा सकता है. और दांतों की समस्या में बाकुची की जड़ को पीसकर उसमें थोड़ी फिटकरी मिलाकर मंजन के रूप में उपयोग करने से दांतों के संक्रमण में राहत मिलती है. बालों के लिए बाकुची तेल को नारियल तेल में मिलाकर सप्ताह में 2 बार बालों में लगाने से लाभ मिलता है.