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हाल ही में चीन में एक बेहद अजीबोगरी मामला सामने आया. जब 23 साल की लड़की के पीरियड्स अचानक आना बंद हो गए. इतना ही नहीं जब डॉक्टरों ने उसकी जांच की तो उसमें 50 साल की महिलाओं वाले मेनोपॉज के लक्षण तो दिखे ही कई हार्मोन्य का स्तर काफी डाउन दिखाई दिया. यह कोई बीमारी से ग्रस्त लड़की नहीं थी बल्कि काफी एक्टिव थी जिसे एक्सरसाइज करने का भूत सवार था और जो खुद को स्वस्थ पाती थी. दरअसल वह सप्ताह में 6 दिन 70-70 मिनट तक व्यायाम करती थी, जिसके बाद उसके शरीर में साइड इफैक्ट्स पैदा हो गए. आखिर ऐसा क्यों हुआ? जबकि व्यायाम करने की सलाह तो हर हेल्थ एक्सपर्ट देता है? आइए एम्स, नई दिल्ली से प्रशिक्षित गायनेकॉलोजिस्ट और इन्फर्टिलिटी एक्सपर्ट से जानते हैं….
खूब व्यायाम करो और डेली करो, ऐसा आपने अक्सर सुना होगा लेकिन क्या कभी सुना है कि व्यायाम करने की लत 23 साल की जवान लड़की को 50 साल की बुजुर्ग महिला बना सकती है, ज्यादा मेहनत और एक्सरसाइज से किसी लड़की के पीरियड्स् बंद हो सकते हैं. नहीं न! लेकिन हाल ही में चीन में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है. आखिर ज्यादा व्यायाम कैसे नुकसान पहुंचा सकता है? क्या एक्सरसाइज और वजन घटाने से पीरियड्स जा सकते हैं? <strong>एम्स नई दिल्ली में प्रशिक्षित गायनेकोलॉजिस्ट और इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. वैशाली शर्मा</strong> से जानते हैं…

डॉ. वैशाली बताती है कि महिलाएं अगर अत्यधिक व्यायाम करती हैं तो उनके शरीर को फायदे के बजाय नुकसान भी हो सकता है. ज्यादा एक्सरसाइज से महत्वपूर्ण हार्मोन कम हो सकते हैं. यह प्रक्रिया सबसे पहले हाइपोथैलेमस से शुरू होती है. इससे निकलने वाला हार्मोन गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हार्मोन पिट्यूटरी ग्रंथि को एफएसएच और एलएच दो महत्पूर्ण हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है, लेकिन ज्यादा एक्सरसाइज से जीएनआरएस का स्तर कम हो जाता है और फिर ये दोनों भी बनने कम हो जाते हैं. ऐसा होने से अंडाशय यानि ओवरी ठीक से उत्तेजित नहीं हो पाती और अंडाणु का निर्माण नहीं होता, उनमें मैच्योरिटी नहीं आती.

<strong>क्या होती है परेशानी:</strong> डॉ. बताती हैं कि जब ओवरी सही तरह से काम नहीं करती, तो ओव्यूलेशन में भी दिक्कत आती है, जो कि रिप्रोडक्शन का सबसे जरूरी फेज है. इसके अलावा वहां से बनने वाले हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन भी कम हो जाते हैं. इससे पीरियड्स गड़बड़ा जाते हैं. पीरियड्स कम हो जाते हैं या बंद भी हो सकते हैं. ब्लीडिंग का फ्लो कम हो सकता है. जैसा कि इस 23 साल की लड़की के मामले में भी देखा गया है.
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<strong>क्या है बीमारी का नाम:</strong> वे कहती है कि जब एक साथ जीएनआरएच, FSH, एलएच, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन सभी कम हो जाते हैं, तो इस स्थिति को फीमेल एथलीट ट्रायड (Female Athlete Triad) कहा जाता है. यह वास्तव में एक फंक्शनल हाइपोथेल्मिक पिट्यूटरी सप्रेसन (Functional Hypothalamic–Pituitary Suppression) बीमारी होती है. जिसमें दिमाग और हार्मोन सिस्टम अस्थायी रूप से दब जाते हैं. यह सामान्य नहीं है.

<strong>क्या है बीमारी का नाम:</strong> वे कहती है कि जब एक साथ जीएनआरएच, FSH, एलएच, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन सभी कम हो जाते हैं, तो इस स्थिति को फीमेल एथलीट ट्रायड (Female Athlete Triad) कहा जाता है. यह वास्तव में एक फंक्शनल हाइपोथेल्मिक पिट्यूटरी सप्रेसन (Functional Hypothalamic–Pituitary Suppression) बीमारी होती है. जिसमें दिमाग और हार्मोन सिस्टम अस्थायी रूप से दब जाते हैं. यह सामान्य नहीं है.

<strong>मन पर भी पड़ता है असर:</strong> इस दौरान मरीजों में देखा जाता है कि हार्मोन सिस्टम के गड़बड़ाने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन (जो कि एक स्ट्रेस हार्मोन होता है) अचानक बढ़ जाता है. जिसका नतीजा यह होता है कि मरीज के अंदर स्ट्रैस और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं. इसके अलावा पीरियड्स ही नहीं बल्कि यौन इच्छा आदि को लेकर भी गंभीर बदलाव होने लगते हैं.

<strong>क्या हैं सबसे बड़े नुकसान:</strong> इसके सबसे बड़े नुकसानों में मासिक धर्म में अनियमितता, पीरियड्स का फ्लो कम होना, शरीर की स्त्री विशेषताओं में बदलाव, यौन इच्छा (Libido) में कमी, समय के साथ हड्डियों की घनता (Bone Mineral Density) भी कम होने लगना आदि शामिल है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो भविष्य में हड्डियों की कमजोरी, फ्रैक्चर और बच्चे पैदा करने में भी परेशानियां हो सकती हैं.

<strong>क्या ठीक हो सकती है ये बीमारी:</strong> डॉ. वैशाली कहती हैं कि ये बीमारी रिवर्सिबल है और इसमें हार्मोन लेवल्स ठीक हो जाते हैं, बशर्ते सही डाइट ली जाए, कैलोरी और प्रोटीन इंटेक ठीक हो, व्यायाम की अवधि को सामान्य रखा जाए, पर्याप्त नींद ली जाए. ऐसा करने से हार्मोन स्तर तो ठीक होगा ही बोन डेंसिटी भी ठीक हो सकती है.

<strong>कितनी देर करना चाहिए व्यायाम:</strong> सामान्य तौर पर एक इंसान को दिन में 20 से 30 मिनट ही एक्सरसाइज करनी चाहिए. इसमें तेज-तेज चलना, दौड़ना, स्ट्रैचिंग, योगा-मेडिटेशन आदि शामिल हो सकता है. बहुत देर तक कठोर व्यायाम, हैवी वेटलिफ्टिंग तभी करनी चाहिए, जब आपके पास सुपरविजन है, जो आपकी डाइट को मैनेज कर रहा हो, आपके कैलोरी और प्रोटीन इंटेक को मॉनिटर कर रहा हो. अगर आपके पास कोई विशेषज्ञ नहीं है तो आपके लिए 20 से 30 मिनट पर्याप्त हैं. वैसे भी साइकिल चलाना, पैदल चलना, तेज-तेज चलना, तैराकी करना आदि सबसे बेहतर व्यायामों में से हैं.