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Fish Contamination Health Risk: प्रदूषित पानी से आने वाली मछलियां सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं. एएमयू के शोधकर्ता ने बताया कि नदियों और नहरों की मछलियों में जहरीले केमिकल और भारी धातुएं जमा हो सकती हैं, जो इंसानों में गंभीर बीमारियों की वजह बनती हैं. आइए जानते हैं पूरी डिटेल खबर.
अलीगढ़: सर्दियों के मौसम में मछली का सेवन काफी बढ़ जाता है. ठंड के दिनों में लोग मछली को पौष्टिक और शरीर को ताकत देने वाला आहार मानते हैं. लेकिन इसी के साथ कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि जिन नदियों, तालाबों और समुद्रों से ये मछलियां आती हैं, वहां बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण का असर कहीं मछलियों के जरिए इंसानों तक तो नहीं पहुंच रहा.
इस गंभीर विषय पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के शोधकर्ता शिरजील अहमद सिद्दीकी ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि मछली पालन की अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं और हर तरह की मछली एक जैसा जोखिम नहीं रखती.
एक्वाकल्चर की मछली ज्यादा सुरक्षित
शिरजील अहमद सिद्दीकी के अनुसार, एक्वाकल्चर यानी नियंत्रित वातावरण में होने वाली मछली फार्मिंग में खतरा काफी हद तक कम होता है. इस प्रक्रिया में साफ पानी और नियंत्रित परिस्थितियों में मछलियों को पाला जाता है, जिससे प्रदूषण का असर कम पड़ता है.
इसके विपरीत नदियों, नहरों और खुले समुद्री इलाकों से आने वाली मछलियां अक्सर प्रदूषित पानी के संपर्क में रहती हैं. अगर पानी में केमिकल, इंडस्ट्रियल वेस्ट या अन्य हानिकारक तत्व मौजूद हों, तो मछलियां उन्हें अपने शरीर में अवशोषित कर लेती हैं. ये तत्व मछली की त्वचा, गलफड़ों और शरीर में मौजूद वसा के जरिए अंदर चले जाते हैं और धीरे-धीरे उसके टिश्यू में जमा हो जाते हैं.
हैवी मेटल्स बनते हैं सबसे बड़ा खतरा
शोधकर्ता ने बताया कि कुछ हल्के केमिकल समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, जिससे नुकसान सीमित रहता है. लेकिन मरकरी, कैडमियम और निकल जैसे हैवी मेटल्स मछली के शरीर में लंबे समय तक बने रहते हैं. जब ऐसी मछलियां इंसान के भोजन का हिस्सा बनती हैं, तो यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में बायोमैग्नीफिकेशन कहा जाता है. इसमें खाद्य श्रृंखला के साथ जहरीले तत्वों की मात्रा लगातार बढ़ती जाती है. यानी जो प्रदूषण पहले छोटी मछली में होता है, वही इंसान तक पहुंचते-पहुंचते कई गुना ज्यादा हो जाता है.
सेहत पर गंभीर असर की आशंका
शिरजील अहमद सिद्दीकी के मुताबिक, लंबे समय तक ऐसी प्रदूषित मछलियों का सेवन इंसान की इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है. इसका सीधा असर किडनी और लिवर पर पड़ता है. लगातार सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
जानिए कैसे करें बचाव?
बचाव के उपायों पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि आम आदमी के पास व्यक्तिगत स्तर पर सीमित विकल्प ही होते हैं. असली समाधान सख्त नियम और नीतियों के जरिए ही संभव है, ताकि इंडस्ट्रियल और केमिकल वेस्ट को बिना जांच पानी में छोड़े जाने से रोका जा सके.
इसके साथ ही लोगों को मछली का अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए. जहां संभव हो, नियंत्रित एक्वाकल्चर में पाली गई मछलियों को प्राथमिकता देनी चाहिए, बजाय उन मछलियों के जो सीधे नदियों या नहरों से आती हैं. सही जानकारी और सावधानी ही सेहत को सुरक्षित रख सकती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें