ना पढ़ाई, ना डिग्री! मजदूर ने खड़ा कर दिया सहरसा का सबसे बड़ा मशरूम फार्म

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हेवन प्रसाद यादव बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने लगभग 2 लाख रुपये की कमाई हो जाती है इतना ही नहीं, उनका यह मशरूम फार्म आज गांव के 8 से 10 लोगों को स्थायी रोजगार भी दे रहा है. मजदूर के रूप में शुरुआत करने वाले हेवन आज खुद रोजगार देने वाले उद्यमी बन चुके हैं.

सहरसा. कहते हैं अगर इरादे मजबूत हो तो हालात भी रास्ता दे ही देते हैं. सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड अंतर्गत बरसम गांव के रहने वाले हेवन प्रसाद यादव की कहानी इसी कहावत को सच साबित करती है न पढ़ाई, न डिग्री और न ही किसी बड़े संसाधन का सहारा लेकिन मेहनत, लगन और सीखने की ललक ने एक साधारण मजदूर को जिले का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक बना दिया.

हेवन प्रसाद यादव ने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा, बचपन से ही उन्होंने मजदूरी कर जीवन चलाया करीब आठ साल पहले रोजगार की तलाश उन्हें हरियाणा ले गई जहां वह एक खेत में मजदूरी करते थे वहीं उन्होंने पहली बार मशरूम उत्पादन का काम देखा. उन्होंने महसूस किया कि मशरूम की बाजार में डिमांड काफी अधिक है और इससे अच्छी आमदनी भी हो सकती है, मजदूरी के साथ-साथ वे मशरूम उत्पादन की बारीकियों को समझते गए और पूरी जानकारी हासिल की.

एक झोपड़ी से की थी शुरुआत
दो साल पहले वह हरियाणा से गांव लौटने के बाद हेवन प्रसाद यादव ने अपने सपनों को जमीन पर उतारने का फैसला किया, शुरुआत उन्होंने गांव में एक छोटी सी झोपड़ी से की. शुरुआती दौर आसान नहीं था संसाधनों की कमी थी, पूंजी नहीं थी, लेकिन हिम्मत और आत्मविश्वास भरपूर था जब थोड़ी कमाई होने लगी तो उन्होंने ब्याज पर पैसा लेकर अपने काम को आगे बढ़ाया और धीरे-धीरे मशरूम उत्पादन का दायरा बढ़ता गया. आज हेवन प्रसाद यादव 12 कट्ठा जमीन पर 6 बड़ी झोपड़ियों में बटर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं. इनमें से 5 झोपड़ियां पूरी तरह तैयार हैं और एक पर काम चल रहा है. एक झोपड़ी तैयार करने में करीब 2 लाख रुपये का खर्च आता है. वर्तमान समय में उनके फार्म से हर महीने करीब 5 कुंटल मशरूम का उत्पादन होता है, जिसकी सप्लाई सिलीगुड़ी, पटना, मुजफ्फरपुर, पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत कई बड़े शहरों में की जाती है.

कई लोगों को दे रहे नौकरी
हेवन प्रसाद यादव बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने लगभग 2 लाख रुपये की कमाई हो जाती है इतना ही नहीं, उनका यह मशरूम फार्म आज गांव के 8 से 10 लोगों को स्थायी रोजगार भी दे रहा है. मजदूर के रूप में शुरुआत करने वाले हेवन आज खुद रोजगार देने वाले उद्यमी बन चुके हैं.

हेवन प्रसाद यादव की यह कहानी न सिर्फ सहरसा जिले बल्कि पूरे इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा है यह साबित करती है कि पढ़ाई न होने के बावजूद अगर सीखने की चाह और मेहनत हो, तो इंसान अपनी तकदीर खुद लिख सकता है.

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Mohd Majid

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