Last Updated:
Arani benefits in hindi : अरणी का पौधा हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. सुबह और शाम इसका काढ़ा पीने से कुछ ही दिनों में मोटापा दूर होने लगता है. इससे सबसे ज्यादा लाभ बावासीर में मिलता है. लोकल 18 ने इस बारे में जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) से बात की. डॉक्टर अमित बताते हैं कि अरणी का हर हिस्सा हमारे लिए रामबाण है. इसका संतुलित उपयोग हमेशा से फायदे का सौदा रहा है. ये सदियों से इस्तेमाल होता आया है.
अरणी का पौधा आयुर्वेद में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना गया है. इस पौधे की जड़, छाल और पत्तियों में कई प्राकृतिक औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिला सकते हैं.

जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) बताते हैं कि अरणी का हर एक भाग हमारे लिए काफी फायदेमंद है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइटोकेमिकल्स, फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो कई बीमारियों से बचाते हैं.

अरणी की जड़ या तने की छाल को पीसकर थोड़ा सा कपूर मिलाकर माथे पर लेप करने से बुखार में लाभ होता है. अरणी के 10-12 पत्तों और 8-10 काली मिर्च को पीसकर ये लेप बनाया जा सकता है. बच्चों के लिए इसे कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए. चिकित्सक की सलाह से ही उपयोग करें.
Add News18 as
Preferred Source on Google

10 ग्राम अरणी और 5 ग्राम त्रिफला लेकर रात को 1 लीटर पानी में मिट्टी के बर्तन में भिगों दें. सुबह इसका काढ़ा बनाकर पिएं. सुबह और शाम दोनों समय इसका उपयोग करें. साथ में हल्का भोजन लें. इससे कुछ ही दिनों में मोटापा दूर होने लगता है.

अरणी के पंचांग का काढ़ा बनाकर सुबह शाम 20-30 मिली मात्रा में पीने से गठिया के दर्द से आराम मिलता है. पंचांग को पीसकर गुनगुना करके जोड़ों पर लगाने से आर्थराइटिस में होने वाले दर्द से राहत मिलती है.

3 ग्राम अरणी के पत्ते, 3 ग्राम बड़ी हरड़ का छिलका लेकर 250 मिली पानी में पकाकर काढ़ा बना लें. इसे सुबह-शाम 20-40 मिली की मात्रा में पिएं. इससे कब्ज की समस्या दूर होती है. इसके अलावा 50 ग्राम अरणी की जड़ को आधा लीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना लें. इस काढ़े को 20-40 मिली मात्रा में सुबह शाम पीने से कब्ज दूर होती है. ये काढ़ा पौष्टिक होता है.

अरणी के पत्तों का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में पीने या इसके पत्तों की पोटली बनाकर बांधने से बवासीर के दर्द से राहत मिलती है. मूली, त्रिफला, मदार, बांस, वरुण, अरणी, सहिजन और अश्मतंक के पाटों का काढ़ा बना लें. इस काढ़े को एक टब में डालें और उस टब में कुछ देर तक बैठें. ऐसा करने से बवासीर के दर्द से तुरंत आराम मिलता है.