खंडवा में अवैध नल कनेक्शन की बाढ़, 36 हजार घरों से करोड़ों का नुकसान, पानी व्यवस्था पर भी भारी असर

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Khandwa News: ग्राउंड पर स्थिति यह है कि अवैध नल कनेक्शन के कारण खंडवा नगर निगम को हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. अगर पूरे साल का हिसाब लगाया जाए तो यह नुकसान करीब 8 से 9 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. यह रकम सिर्फ जलकर की है जो सीधे तौर पर निगम की आमदनी में जानी चाहिए थी. लेकिन अवैध कनेक्शन के कारण निगम को यह पैसा नहीं मिल पा रहा है.

खंडवा शहर में पानी की समस्या और नगर निगम की आर्थिक हालत के पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है. नगर निगम क्षेत्र में करीब 65 हजार से ज्यादा घर है. लेकिन इनमें से सिर्फ करीब 29 हजार घरों में ही वैध नल कनेक्शन है. बाकी के लगभग 36 हजार घरों में आज भी अवैध नल कनेक्शन चल रहे है. जिससे हर महीने नगर निगम को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है और सालाना यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच जाता है.

ग्राउंड पर स्थिति यह है कि अवैध नल कनेक्शन के कारण खंडवा नगर निगम को हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. अगर पूरे साल का हिसाब लगाया जाए तो यह नुकसान करीब 8 से 9 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. यह रकम सिर्फ जलकर की है जो सीधे तौर पर निगम की आमदनी में जानी चाहिए थी. लेकिन अवैध कनेक्शन के कारण निगम को यह पैसा नहीं मिल पा रहा है.

जल विभाग प्रभारी और पार्षद राजेश यादव ने बताया कि वे पिछले तीन सालों से लगातार इस समस्या को देख रहे है. उन्होंने बताया कि नगर निगम ने अवैध कनेक्शन को वैध करने के लिए अभियान भी चलाया था. जिसमें सिर्फ 2750 रुपये जमा कराकर लोग अपना नल कनेक्शन वैध करवा सकते थे. इसमें यह भी नहीं देखा गया कि कोई व्यक्ति 10 साल से अवैध कनेक्शन चला रहा है या 15 साल से. सभी को एक समान छूट दी गई. इसके बावजूद तीन साल में सिर्फ करीब 5 हजार लोगों ने ही आवेदन कर अपने कनेक्शन वैध करवाए.

राजेश यादव ने बताया कि वर्तमान में खंडवा शहर में केवल 29 हजार नल कनेक्शन ही वैध है. जिनसे निगम को जलकर मिलता है. हैरानी की बात यह है कि इनमें से भी कई ऐसे उपभोक्ता है. जिन्होंने 10 से 20 सालों से जलकर का बिल नहीं भरा है. करोड़ों रुपये का जलकर आज भी बकाया पड़ा हुआ है. शहर तेजी से फैल रहा है. नई-नई कॉलोनियां कट रही है. लेकिन कई जगह कॉलोनाइजर खुद ही पानी का कनेक्शन दे देता है और लोग नगर निगम में जाकर उसे वैध करवाने की जरूरत ही नहीं समझते.

ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई कॉलोनियों में जागरूक नागरिक जरूर है जो जलकर भरते है और वैध कनेक्शन लेते है. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है. अभी भी शहर की कई बस्तियों और कॉलोनियों में खुलेआम अवैध कनेक्शन चल रहे है. कई घरों में एक नहीं बल्कि दो से तीन पानी के कनेक्शन लगे हुए है और वो सभी अवैध है.

नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि शहर में सबसे ज्यादा अवैध नल कनेक्शन नागपुर रोड के खानसाहब अली क्षेत्र, टपाल चाल और आसपास की कई कॉलोनियों में है. इन इलाकों में एक ही घर में कई-कई कनेक्शन चल रहे है. जिससे निगम को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. जब निगम की टीम अवैध कनेक्शन काटने पहुंचती है तो कई जगह लोगों का विरोध और झगड़ा सामने आता है. कुछ इलाकों में अवैध कनेक्शन वालों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिल जाता है. जिससे कार्रवाई और मुश्किल हो जाती है.

अवैध नल कनेक्शन की वजह से नगर निगम को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. निगम के पास संसाधनों की कमी बनी रहती है. जिसका सीधा असर आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है. सवाल यह है कि अगर समय रहते अवैध कनेक्शन पर सख्ती नहीं की गई तो आने वाले समय में खंडवा नगर निगम की हालत और भी खराब हो सकती है.

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खंडवा नगर निगम को अवैध नल कनेक्शन से हर साल करोड़ों का नुकसान

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