धान खरीदी पूरी पर अटका भुगतान! बालाघाट में परिवहन की सुस्ती से परेशान किसान, खुले आसमान के नीचे पड़ा लाखों क्विंटल धान

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Balaghat News: धान खरीदी केंद्रों पर धान के पहाड़ बन गए है. लोकल 18 की टीम ने बालाघाट जिले के रमरमा, सिंगोड़ी और सिकंदरा सहित दर्जनों धान खरीदी केंद्रों का दौरा किया. वहां लंबे समय से धान का परिवहन नहीं हो पा रहा है. जिससे धान के बोरों के पहाड़ खड़े हो गए है. लालबर्रा सेक्टर में सबसे ज्यादा समस्या है. जहां पंकजम इंटरप्राइजेस को परिवहन का टेंडर मिला है. धीमे परिवहन पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए टेंडर रद्द कर दिया था. लेकिन कंपनी ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया. अब भी 11 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है.

मध्य प्रदेश में 20 जनवरी तक चलेगी. हालांकि, बालाघाट में किसान परेशान है. धान खरीदी केंद्रों पर धान तो पहुंच चुका है और उसकी तुलाई भी हो गई है. लेकिन किसानों के खाते में पैसे नहीं आए है. इसका कारण धीमा परिवहन है. नियम के अनुसार धान बिकने के बाद उसका परिवहन होना चाहिए और उसके बाद किसानों के खाते में डीबीटी या सहकारी संस्थाओं के माध्यम से भुगतान होना चाहिए. लेकिन समय पर परिवहन न होने से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही है.

धान खरीदी केंद्रों पर धान के पहाड़ बन गए है. लोकल 18 की टीम ने बालाघाट जिले के रमरमा, सिंगोड़ी और सिकंदरा सहित दर्जनों धान खरीदी केंद्रों का दौरा किया. वहां लंबे समय से धान का परिवहन नहीं हो पा रहा है. जिससे धान के बोरों के पहाड़ खड़े हो गए है. लालबर्रा सेक्टर में सबसे ज्यादा समस्या है. जहां पंकजम इंटरप्राइजेस को परिवहन का टेंडर मिला है. धीमे परिवहन पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए टेंडर रद्द कर दिया था. लेकिन कंपनी ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया. अब भी 11 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है.

परिवहन न होने से धान खरीदी केंद्र के प्रभारी भी परेशान है. लोकल 18 ने कुछ प्रभारियों से बातचीत की. जिन्होंने बताया कि धान के लिए बने मंच अब फुल हो चुके है और केंद्रों पर धान रखने की जगह नहीं है. जमीन पर तिरपाल बिछाकर धान स्टॉक किया जा रहा है. लेकिन मौसम बिगड़ने पर धान के खराब होने की आशंका है. धान खरीदी केंद्रों पर ज्यादा समय तक धान पड़े रहने से चुहों का खतरा भी बना हुआ है. किसान भी परेशान है क्योंकि धान बेचने के बाद भी कई हफ्तों से फसल की कीमत अदा नहीं हुई है.

उन्होंने लोकल 18 को बताया कि सरकार ने पहले ही वादाखिलाफी की है और अब केंद्रों पर व्यवस्थाएं भी नहीं हैं. समय पर भुगतान न होने से किसान परेशान है.बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना इस मामले में लगातार अधिकारियों से बैठक कर निर्देश दे रहे है कि परिवहन की गति तेज हो जाए. लेकिन हालात वही बने हुए है. अब तक 52 लाख 1 हजार क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है, जबकि 11 लाख क्विंटल से ज्यादा धान खुले आसमान में पड़ा हुआ है.

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धान खरीदी पूरी पर अटका भुगतान, बालाघाट में खुले आसमान के नीचे पड़ा धान

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