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Khandwa News: अनीता बताती है कि शुरुआत में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से छोटा सा लोन लिया था. जिससे कैंटीन शुरू की. धीरे-धीरे काम बढ़ा और आज वह लोन भी चुका चुकी है. अब पति-पत्नी दोनों मिलकर मेहनत करते है और सम्मानजनक तरीके से परिवार का पालन-पोषण कर रहे है.
खंडवा के पति-पत्नी की संघर्ष से सफलता तक की कहानी आपको बताने जा रहे है. कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो छोटी शुरुआत भी बड़ी सफलता में बदल जाती है. खंडवा में रहने वाले पति-पत्नी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. पांच साल पहले पत्नी ने स्वयं सहायता समूह से छोटा सा लोन लेकर भोजन सेवा केंद्र की शुरुआत की थी. आज मेहनत और लगन का नतीजा यह है कि अब पति भी साथ आ गए है और दोनों मिलकर अपने इस छोटे से व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला रहे है. यह पति-पत्नी की जोड़ी खंडवा के जीडीसी गर्ल्स कॉलेज में कैंटीन संचालित कर रही है. जहां छात्राओं को कम दामों में घर जैसा शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराया जाता है. कॉलेज की छात्राओं के बीच इनकी कैंटीन काफी लोकप्रिय हो चुकी है.
LOCAL 18 से बातचीत में अनीता विजय मौर्य बताती है कि वे मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली है. लेकिन शादी के बाद खंडवा आ गई. उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई की है. पढ़ाई आगे नहीं हो पाई, लेकिन मन में कुछ खुद का करने का सपना था. अनीता कहती है कि उन्हें खाना और नाश्ता बनाना अच्छा लगता था. तभी उन्होंने भोजन सेवा केंद्र खोलने का फैसला किया. इस सफर में उनके पति विजय मौर्य ने पूरा साथ दिया.
अनीता बताती है कि शुरुआत में उन्होंने स्वयं सहायता समूह से छोटा सा लोन लिया था. जिससे कैंटीन शुरू की. धीरे-धीरे काम बढ़ा और आज वह लोन भी चुका चुकी है. अब पति-पत्नी दोनों मिलकर मेहनत करते है और सम्मानजनक तरीके से परिवार का पालन-पोषण कर रहे है.
विजय मौर्य बताते है कि वे पेशे से इलेक्ट्रीशियन है. लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में पत्नी का साथ देना जरूरी लगा. वे कहते है कि दोनों साथ काम करते है तो घर चलाना आसान हो जाता है. विजय बताते है कि वे खुद भी खाना बनाना जानते है और कैंटीन के काम में पूरी मदद करते है.
पति-पत्नी का कहना है कि वे सिर्फ 70 रुपये में भरपेट भोजन का टिफिन तैयार करते है. जिसमें दाल, सब्जी, रोटी और चावल शामिल होते है. कम कीमत में अच्छी क्वालिटी का खाना देने की वजह से छात्राओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. इस भोजन सेवा केंद्र का नाम हरिहर भोजनालय है और इनका निवास खंडवा के लाल चौकी क्षेत्र में स्थित है. अनीता और विजय की यह कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहते है.
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