गांव की बहू से, शहर की उद्यमी तक…सपना ने पनीर के व्यवसाय से लिखी सफलता की कहानी, शुद्धता दे, कब्जायी मार्केट!

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Sitamarhi Sapna Devi: सीतीमढ़ी की सपना देवी पनीर के व्यवसाय से सफलता की नई इबारत लिख रही हैं. पहले गहरे आर्थिक संकट से जूझ रही सपना अब शुद्ध पनीर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाती हैं. उनके पनीर की कीमत ज्यादा होती है पर प्योरिटी के कारण लोग खरीदारी से पीछे नहीं हटते.

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सीतामढ़ी. कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित मानी जाने वाली महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं. ऐसी ही एक प्रेरक कहानी सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर प्रखंड के टिकौली गांव की एक महिला की है, जिन्होंने शुद्ध पनीर के व्यवसाय से न सिर्फ अपनी अलग पहचान बनाई है, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया है. गांव की बहू होकर उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी के बल पर भरोसे का नाम कमाया है और आज उनका पनीर गुणवत्ता के लिए जाना जाता है.

साफ-सफाई और धैर्य से बनायी पहचान
इनका नाम है सपना. सपना गाय और भैंस के शुद्ध दूध से खुद पनीर तैयार करती हैं. उनका कहना है कि आज बाजार में मिलने वाले ज्यादातर लोकल पनीर में मिलावट होती है, जिससे न तो सही स्वाद मिलता है और न ही सेहत की सुरक्षा होती है. इसी वजह से उन्होंने शुद्ध, ताजा और बिना मिलावट वाला पनीर बनाने का फैसला लिया. वे अपने घर पर ही पूरी साफ-सफाई के साथ पनीर बनाती हैं और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए ग्राहकों तक पहुंचाती हैं. उनके अनुसार सही तापमान, साफ-सफाई और धैर्य ही अच्छे पनीर की पहचान है.

दाम ज्यादा फिर भी जमकर बिक्री
व्यवसाय की बात करें तो सामान्य दिनों में वे रोजाना 5 से 10 किलो पनीर तैयार करती हैं, जो आसानी से बिक जाता है. वहीं शादी-ब्याह और त्योहारों के मौसम में मांग काफी बढ़ जाती है. ऐसे समय में 20, 25 से लेकर 40 किलो तक पनीर की बिक्री हो जाती है. शुद्ध दूध से तैयार उनका पनीर 600 से 700 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, जबकि बाजार में मिलने वाला साधारण पनीर 200 से 300 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध होता है. इसके बावजूद ग्राहक गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके पनीर को ही प्राथमिकता देते हैं.

फ्रेशनेस के लिए ऑर्डर पर ही बनाती हैं
सपना देवी बताती हैं कि वे मुख्य रूप से ऑर्डर के आधार पर ही पनीर तैयार करती हैं, ताकि ग्राहकों को हमेशा ताजा उत्पाद मिल सके. इस काम में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग मिलता है. उनके पति संतोष कुमार पहले रोजगार के लिए दिल्ली में रहकर सिलाई-कटाई का काम करते थे और मुश्किल से घर के खर्च के बाद 4–5 हजार रुपये ही बच पाते थे. अब उन्होंने बाहर जाना छोड़ दिया है और घर पर रहकर पत्नी के इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं. पति-पत्नी मिलकर उत्पादन, बिक्री और ग्राहकों से संपर्क संभालते हैं.

गांव की बहू, शहर की सफल उद्यमी
इस व्यवसाय से अब परिवार की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. सपना बताती हैं कि पनीर के काम से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की बचत हो रही है. इससे न सिर्फ आर्थिक मजबूती आई है, बल्कि परिवार को साथ रहने और बच्चों को समय देने का मौका भी मिला है. उनका मानना है कि अगर मेहनत और ईमानदारी से काम किया जाए तो घर बैठे भी अच्छा रोजगार खड़ा किया जा सकता है. सीतामढ़ी की यह महिला आज कई ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और यह साबित कर रही हैं कि गांव की बहू भी शहर की सफल उद्यमी बन सकती हैं.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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गांव की बहू से, शहर की उद्यमी तक…सपना ने इस व्यवसाय से लिखी सफलता की कहानी!

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