डायबिटीज की दवा जंगल में? आदिवासी औषधीय पौधों का चौंकाने वाला सच

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Health News: अमित गुप्ता ने कहा कि डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह अनियमित खानपान और गलत लाइफस्टाइल है. इस बीमारी से बचाव और नियंत्रण के लिए बाहरी और जंक फूड से दूरी बनाना बहुत जरूरी है.

रायपुर. छत्तीसगढ़ में पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान और औषधीय पौधों की उपयोगिता एक बार फिर चर्चा में है. छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा और औषधि के कंसल्टेंट अमित कुमार गुप्ता ने लोकल 18 से औषधीय पौधों और डायबिटीज नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि आयुर्वेद और जनजातीय चिकित्सा पद्धति में औषधीय पौधों का सीधा और प्राकृतिक उपयोग किया जाता है, जो शरीर पर बिना साइड इफेक्ट के सकारात्मक असर डालते हैं. मेडिसिनल प्लांट्स के ताजे पौधों का डायरेक्ट उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है. आयुर्वेद में इन्हीं पौधों के कच्चे रूप यानी रॉ प्रोडक्ट को सुखाकर और प्रोसेस करके दवाइयां तैयार की जाती हैं. यह पद्धति वर्षों से चली आ रही है और आज भी ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है. उन्होंने डायबिटीज को एक गंभीर और तेजी से फैलती बीमारी बताया.

अमित गुप्ता के अनुसार, डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण अनियमित खानपान और गलत लाइफस्टाइल है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी से बचाव और नियंत्रण के लिए बाहरी और जंक फूड से दूरी बनाना जरूरी है. घर का बना, कम कैलोरी और संतुलित भोजन अपनाकर डायबिटीज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

गुड़मार प्रभावशाली औषधीय पौधा
डायबिटीज नियंत्रण में औषधीय पौधों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गुड़मार एक बेहद प्रभावी औषधीय पौधा है. यह जंगल में पाया जाता है. गुड़मार के पत्ते शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. यदि कोई व्यक्ति गुड़मार की पत्तियां चबाने के बाद शक्कर या गुड़ खाता है, तो उसे मीठेपन का स्वाद महसूस नहीं होता. इसका कारण यह है कि गुड़मार मीठेपन को खत्म करने की क्षमता रखता है, जिससे शुगर की क्रेविंग भी कम होती है.

स्टीविया पौधा भी उपयोगी
उन्होंने आगे कहा कि इसके अलावा स्टीविया के पौधे को भी डायबिटीज रोगियों के लिए उपयोगी बताया गया है. स्टीविया की पत्तियां प्राकृतिक रूप से काफी मीठी होती हैं और इसे शक्कर या गुड़ के सुरक्षित विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. स्टीविया की पत्तियों को सुखाकर चूर्ण बनाया जा सकता है या ताजी पत्तियों का भी उपयोग किया जा सकता है. खासतौर पर वे लोग इसका अधिक उपयोग करते हैं, जिन्हें डायबिटीज हो चुकी है.

इंसुलिन प्लांट भी फायदेमंद
अमित कुमार गुप्ता ने इंसुलिन प्लांट का भी जिक्र किया, जो डायबिटीज से लड़ने में सहायक माना जाता है. उन्होंने कहा कि यदि इन औषधीय पौधों का सही जानकारी और संतुलित मात्रा में उपयोग किया जाए, तो डायबिटीज नियंत्रण में यह काफी लाभकारी हो सकते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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