कहीं से भी देखो… दिखेंगे 12 दरवाजे, अहिल्या बाई ने बनवाई थी ये इमारत, आज भी घुमा देती है सिर!

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MP Tourism: खरगोन में एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है, जिसे देखकर हर पर्यटक हैरान रह जाता है. पहाड़ी पर बनी यह इमारत न सिर्फ अपनी अनोखी बनावट के लिए फेमस है, बल्कि किसी भूल भुलैया से कम नहीं है. इसे जिस भी दिशा से देखा जाए, हर ओर सिर्फ दरवाजे ही दरवाजे नजर आते हैं. 

खरगोन जिले की पर्यटन नगरी महेश्वर के पास मलेक्षाखेड़ी गांव के समीप स्थित एक इमारत, जो किसी भूल भुलैया से कम नहीं है. क्षेत्र में ‘बारहद्वारी’ के नाम से जानी जाती है. करीब 300 साल पुरानी यह धरोहर पत्थरों और ईंटों से बनी है. इसकी बनावट इतनी अलग है कि पहली नजर में ही देखने वाले का दिमाग चकरा जाता है.

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बारहद्वारी की सबसे खास बात ये कि इसे किसी भी दिशा से देखने पर 12 द्वार दिखाई देते हैं. कई बार लोग इन दरवाजों की गिनती करने लगते हैं, लेकिन भ्रम की स्थिति बन जाती है. चारों ओर दरवाजों से घिरी यह इमारत वास्तुकला का एक अद्भुत उदाहरण मानी जाती है.

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यह धरोहर एक खूबसूरत तालाब के किनारे स्थित है. तालाब के पानी में इसका प्रतिबिंब ऐसा लगता है, मानो कोई जहाज पानी में तैर रहा हो. पहाड़ी, पानी और पत्थरों से बनी यह संरचना मिलकर इसे बेहद आकर्षक बनाती है.

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इतिहासकार हरीश दुबे बताते हैं  कि बारहद्वारी का निर्माण होलकर काल में महारानी अहिल्या बाई होलकर द्वारा कराया गया था. राज्य की शासक बनने के बाद अहिल्या बाई ने इंदौर के बजाय महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया था और इंदौर से महेश्वर के आवागमन के दौरान सैनिकों के विश्राम के लिए इस इमारत का उपयोग किया जाता था.

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इस परिसर में सैनिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए घुड़साल भी बनाई गई थी. पानी की जरूरत के लिए पास में एक तालाब खुदवाया गया, जिसमें सालभर पानी रहता है. बताया जाता है कि रात के समय रोशनी के लिए बारहद्वारी के हर पिलर पर दीपक जलाए जाते थे, जिससे पूरा परिसर जगमगाता रहता था.

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बारहद्वारी के नीचे एक गुप्त कक्ष और मराठा शैली में बना भगवान श्रीराम का मंदिर भी है. इस मंदिर में भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी विराजमान हैं. पास ही चिरंजीवी हनुमान का मंदिर भी है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है.

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यह मंदिर खासगी ट्रस्ट के अधीन है और इसके प्रबंधक जिला कलेक्टर होते हैं. धार्मिक मान्यताओं के चलते यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यहां का शांत वातावरण उन्हें एक अलग ही अनुभूति देता है.

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वहीं, ज्योतिषीय दृष्टि से भी बारहद्वारी को खास माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार इसके 12 द्वार 12 राशियों के प्रतीक हैं. ज्योतिषी डॉ. बसंत सोनी के मुताबिक, एक द्वार से दूसरे द्वार में प्रवेश, एक ग्रह से दूसरे ग्रह में प्रवेश को दर्शाता है. मान्यता है कि यहां जाप और साधना करने से ग्रहों से जुड़ी परेशानियों और पारिवारिक समस्याओं में शांति मिलती है.

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