झाबुआ जिले की ग्राम पंचायत तारखेड़ी के अंतर्गत आने वाले गरवाखेड़ी गांव के ग्रामीणों ने खाद्यान्न पर्ची में धांधली की शिकायत की है। ग्रामीणों ने पेटलावद जनसुनवाई में नायब तहसीलदार विजेंद्र कटारे को अपनी समस्या बताई।
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ग्रामीणों ने भविष्य हीरालाल पटेल के नेतृत्व में प्रशासन को बताया कि गांव में पात्र और जरूरतमंद गरीब आदिवासी पिछले 10 वर्षों से सरकारी राशन के लिए भटक रहे हैं। वहीं, संपन्न और रसूखदार लोग फर्जी तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में कई ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास आलीशान मकान, चार पहिया वाहन, ट्रैक्टर और 5 हेक्टेयर तक कृषि भूमि है। ये लोग सालाना 500 क्विंटल तक गेहूं का उत्पादन करते हैं, फिर भी उनके नाम खाद्यान्न पर्ची की सूची में दर्ज हैं।
शिकायत में सीधे तौर पर जनपद पंचायत पेटलावद के कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनपद के बाबू द्वारा कथित तौर पर सांठगांठ कर और रुपए का लेनदेन कर आर्थिक रूप से सक्षम लोगों के फर्जी खाद्यान्न पर्ची और कर्मकार कार्ड बनाए गए हैं।
गरीबों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ
इस भ्रष्टाचार के कारण वास्तविक गरीब आदिवासी परिवार अनाज के दाने-दाने को तरस रहे हैं और उन्हें शासन की किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गरवाखेड़ी में तत्काल एक विशेष टीम भेजकर पात्रता पर्चियों की जमीनी स्तर पर जांच की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अपात्र अमीरों के नाम सूची से काटकर उन गरीब आदिवासियों के नाम जोड़े जाएं जो वास्तव में इस सहायता के हकदार हैं, ताकि उन्हें समय पर राशन मिल सके।
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