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Cough Relief Remedy: लगातार खांसी, छाती में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ की समस्या आज आम होती जा रही है. ऐसे में लोग घरेलू और आयुर्वेदिक उपायों की ओर रुख कर रहे हैं. आयुर्वेद में भुनी हुई हींग को खांसी और कफ के लिए असरदार माना गया है. हींग की गर्म तासीर कफ को ढीला कर बाहर निकालने में मदद करती है. इससे सूखी और बलगम वाली खांसी में राहत मिल सकती है. हालांकि विशेषज्ञ सावधानी बरतने और गंभीर लक्षणों पर डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह देते हैं.
लगातार खांसी, छाती में भारीपन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं आज बदलती जीवनशैली और मौसम के कारण आम होती जा रही हैं.सर्दी-खांसी की समस्या कई बार लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे व्यक्ति की दिनचर्या प्रभावित होती है.ऐसे में लोग घरेलू और प्राकृतिक उपायों की ओर रुख कर रहे हैं. आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में भुनी हुई हींग को खांसी और कफ की समस्या के लिए एक असरदार देसी नुस्खा माना गया है.

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार हींग की तासीर गर्म होती है. यह शरीर में जमा कफ को धीरे-धीरे ढीला करने में मदद करती है. जब कफ ढीला हो जाता है तो उसे बाहर निकालना आसान हो जाता है. इससे खांसी के दौरे कम होने लगते हैं. पुरानी सूखी खांसी हो या बलगम वाली खांसी, दोनों ही स्थितियों में हींग को लाभकारी माना जाता है. हींग पाचन तंत्र को मजबूत करती है और गले में जमा कफ को साफ करने में सहायक होती है. नियमित और सीमित मात्रा में हींग का सेवन करने से सांस लेने में राहत मिलती है.

भुनी हुई हींग का सेवन छाती की जकड़न और भारीपन को कम करने में सहायक माना जाता है. सर्दी-जुकाम के बाद कई बार छाती में दबाव महसूस होता है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. ऐसे में हींग शरीर को अंदर से गर्म रखती है और ठंड के प्रभाव को कम करने में मदद करती है. इससे छाती में जमी कफ की परत धीरे-धीरे ढीली होने लगती है. खासतौर पर रात के समय होने वाली खांसी में भुनी हुई हींग का उपयोग आराम पहुंचा सकता है और नींद बेहतर बनाने में सहायक होता है.
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इस देसी नुस्खे को तैयार करना बेहद आसान माना जाता है. आधा चम्मच हींग को हल्की आंच पर भून लिया जाता है. इसके बाद इसे एक कप गुनगुने पानी में अच्छी तरह घोल दिया जाता है. इस मिश्रण को धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पीने की सलाह दी जाती है. आमतौर पर दिन में एक बार इसका सेवन पर्याप्त माना जाता है. हालांकि ज्यादा परेशानी होने पर इसे दिन में दो बार भी लिया जा सकता है. नियमित और सीमित मात्रा में इसका उपयोग करने से खांसी, कफ और छाती की जकड़न में राहत मिलने की बात कही जाती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी घरेलू उपाय का उपयोग सावधानी के साथ करना चाहिए. हींग का अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में जलन, गैस या असहजता हो सकती है. जिन लोगों को अल्सर या पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं, उन्हें इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. गर्भवती महिलाओं के लिए भी हींग का उपयोग बिना चिकित्सकीय परामर्श के नहीं करना चाहिए. वहीं छोटे बच्चों को हींग देने से पहले भी खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके.

घरेलू उपाय कई बार लक्षणों में राहत देने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी भी स्थिति में इलाज का पूर्ण विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे या सांस लेने में अधिक तकलीफ महसूस हो, तो लापरवाही नहीं करनी चाहिए. खांसी के साथ बुखार, सीने में दर्द या कमजोरी जैसी अन्य समस्याएं जुड़ जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी माना जाता है. समय पर सही चिकित्सकीय सलाह लेने से बीमारी की सही पहचान हो पाती है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव संभव होता है.