ठंड में बच्चों के लिए मुसीबत ‘कान की सुन्नी’, दादी-नानी का नुस्खा आज भी असरदार

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सर्दियों के मौसम में छोटे बच्चों के कानों में भारीपन, दर्द या सुनने में परेशानी की शिकायत आम हो जाती है, जिसे ठंड में गांवों में कान की सुन्नी कहा जाता है. बघेलखंड क्षेत्र में बुजुर्ग महिलाएं इसे ठंडी हवा, नमी और कमजोर इम्युनिटी से जोड़कर देखती हैं और घरेलू देखभाल और देसी उपायों से ही बच्चों के इलाज की परंपरा निभाती आ रही हैं.

सर्दियों का मौसम आते ही बच्चों में सर्दी-जुकाम के साथ कान से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं. बघेलखंड अंचल में इसे आम बोलचाल में ठंड में कान की सुन्नी कहा जाता है, जिसमें कान भारी लगना, सुनने में दिक्कत या दर्द जैसी परेशानी सामने आती है.

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आधुनिक इलाज के साथ-साथ बघेलखंड के गांवों में आज भी दादी-नानी के देसी नुस्खों पर भरोसा किया जाता है. लोकल 18 से कमला तिवारी ने कहा कि ये उपाय पीढ़ियों से अपनाए जा रहे हैं, जो ठंड के असर को कम करने और बच्चों के कानों को सुरक्षित रखने में सहायक माने जाते हैं.

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पुराने समय में सरसों के तेल में लहसुन की कली गर्म कर उसका हल्का गुनगुना तेल कान के आसपास मालिश में इस्तेमाल करते थे. इससे ठंड का असर कम होता है और कान में जकड़न या भारीपन से राहत मिलने की परंपरागत मान्यता है.

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अजवाइन को हल्का भूनकर कपड़े में बांधकर कान के पास सेंक देना एक पुराना देसी उपाय है. कमला तिवारी ने कहा कि इससे ठंड बाहर निकलती है और बच्चों को कान के दर्द या जकड़न से आराम मिलता है.

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तिल के तेल में लहसुन डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. ठंडा होने पर इस तेल से कान के पीछे और आसपास मालिश की जाती है. बघेलखंड में इसे सर्दियों में बच्चों के लिए बेहद कारगर देसी नुस्खा माना जाता है.

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पानी की भाप सूंघने से बंद नाक खुलती है और सांस लेने में आसानी होती है. एक बड़े बर्तन में गर्म पानी लेकर, बच्चे को सुरक्षित दूरी पर बिठाएं और भाप दें. थोड़ी देर में ही बच्चे के गले में जमा कफ नाक या मुंह से निकलने लगेगा और जल्द ही आराम मिलेगा.

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रात में हल्दी मिला गुनगुना दूध बच्चों को पिलाने की सलाह दी जाती है. पुराने लोगों की मानें तो यह शरीर को अंदर से गर्म रखता है और ठंड के कारण होने वाली कान की परेशानियों को कम करने में मदद करता है.

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वैसे तो दादी-नानी के ये देसी उपाय ठंड में राहत देने वाले माने जाते हैं लेकिन इसके अलावा सेंधा नमक और देसी घी का पेस्ट बनाकर छोटे बच्चों की छाती पर लगाने से भी जल्द आराम मिल सकता है.

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