स्ट्रोक में हर सेकेंड है कीमती, जान बचा सकता है ‘FAST’ फॉर्मूला, अभी समझें इसके संकेत

इंडियन आइडल सीजन 3 के विनर और एक्टर प्रशांत तमांग के 43 वर्ष की उम्र में स्ट्रोक से निधन की खबर ने सभी को झकझोर दिया है. यह दुखद घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्ट्रोक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं है. आज के समय में कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ऐसे में स्ट्रोक के बारे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव साबित हो सकती है.

स्ट्रोक को ब्रेन अटैक भी कहा जाता है. यह स्थिति तब पैदा होती है जब दिमाग तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक कम हो जाती है या रुक जाती है. दिमाग को कुछ ही मिनटों के लिए ऑक्सीजन न मिले, तो उसकी कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं. इसी कारण स्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है.

स्ट्रोक के प्रकार
मेडिकल साइंस के अनुसार स्ट्रोक मुख्य रूप से दो तरह का होता है. पहला इस्केमिक स्ट्रोक, जो दिमाग की नसों में खून का थक्का जमने से होता है. दूसरा हेमोरेजिक स्ट्रोक, जो किसी रक्त वाहिका के फटने की वजह से होता है. इसके अलावा मिनी स्ट्रोक या टीआईए भी होता है, जिसमें लक्षण कुछ मिनटों या घंटों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का गंभीर संकेत माना जाता है.

आयुष मंत्रालय का ‘FAST’ फॉर्मूला
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक की पहचान को आसान बनाने के लिए ‘FAST’ फॉर्मूला बताया है. यह तरीका शुरुआती लक्षणों को समझने और समय रहते इलाज शुरू करने में बेहद मददगार है.

F – Face (चेहरा)
देखें कि व्यक्ति का चेहरा टेढ़ा तो नहीं हो गया है. क्या मुस्कराने पर एक तरफ का चेहरा ढीला या झुका हुआ दिख रहा है.

A – Arms (हाथ)
व्यक्ति से दोनों हाथ ऊपर उठाने को कहें. अगर एक हाथ कमजोर है या अपने आप नीचे गिर रहा है, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है.

S – Speech (बोलचाल)
ध्यान दें कि बोलने में परेशानी तो नहीं हो रही. आवाज अस्पष्ट, लड़खड़ाती या समझने में मुश्किल लग रही हो, तो इसे नजरअंदाज न करें.

T – Time (समय)
अगर ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो समय बर्बाद किए बिना तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें. स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है.

आयुर्वेद में स्ट्रोक का नजरिया
आयुर्वेद के अनुसार स्ट्रोक को वात दोष के असंतुलन से जुड़ा एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल रोग माना जाता है. जब वात बिगड़ता है, तो नसों और मस्तिष्क के कार्य प्रभावित होने लगते हैं. इसलिए आयुर्वेद में वात को संतुलित रखना स्ट्रोक से बचाव का अहम तरीका बताया गया है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ स्वस्थ दिनचर्या अपनाने की सलाह देते हैं. इसमें सुबह समय पर उठना, रात को जल्दी सोना और नियमित दिनचर्या का पालन करना शामिल है. अनियमित जीवनशैली वात को बढ़ा सकती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.

सही डाइट है सबसे जरूरी
भोजन में गर्म, ताजा और पौष्टिक चीजों को शामिल करें. दालें, सब्जियां, सूप, घी और सीमित मात्रा में तेल वात को संतुलित रखने में मदद करते हैं. ठंडा, बहुत सूखा, तला-भुना और बासी खाना नुकसानदायक हो सकता है. समय पर भोजन करना और लंबे समय तक भूखे न रहना भी जरूरी है.

योग, व्यायाम और अभ्यंग का महत्व
रोजाना हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम करने से रक्त संचार बेहतर होता है. इसके साथ ही तिल के तेल से शरीर की मालिश यानी अभ्यंग करने से नसों को मजबूती मिलती है और वात शांत रहता है.

तनाव और बुरी आदतों से दूरी
तनाव स्ट्रोक का बड़ा कारण बन सकता है. इसलिए ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और मानसिक शांति पर ध्यान देना जरूरी है. धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों को कंट्रोल में रखना भी स्ट्रोक के खतरे को कम करता है.

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