Last Updated:
Darma Mooli Benefits: दारमा घाटी की खास पहाड़ी मूली स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में बेजोड़ है. सर्दियों में ताज़ी सब्ज़ियों की कमी के बावजूद स्थानीय लोग इसे सुखाकर सालभर इस्तेमाल करते हैं. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत रहता है, लिवर को फायदा मिलता है और शरीर में ठंड में भी ऊर्जा बनी रहती है. यह केवल एक सब्ज़ी नहीं, बल्कि दारमा की पारंपरिक जीवनशैली और पोषण का प्रतीक है.
पिथौरागढ़: दारमा घाटी के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में एक खास प्रकार की मूली पाई जाती है, जो स्थानीय लोगों के भोजन और स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है. यह मूली सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जानी जाती है. दारमा जैसे ठंडे इलाकों में, जहां सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, ताज़ी सब्ज़ियां लंबे समय तक उपलब्ध नहीं रहतीं. ऐसे में स्थानीय लोग इस मूली को काटकर धूप में सुखा लेते हैं और फिर पूरे साल इसका उपयोग करते हैं.
स्वास्थ्य के लिए लाभदायक पहाड़ी मूली
सूखी मूली दारमा की पारंपरिक खाद्य संस्कृति का हिस्सा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इसके सेवन से पाचन तंत्र मजबूत रहता है और शरीर भीतर से साफ़ रहता है. यह परहेज़ वाली बीमारियों, जैसे पीलिया, में भी फायदेमंद है. बुज़ुर्ग बताते हैं कि मूली लिवर को मज़बूती देती है और ठंडे मौसम में शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों के लिए यह पोषण का भरोसेमंद स्रोत है.
दारमा मूली बनाने की पारंपरिक रेसिपी
दारमा में इस मूली को बनाने की खास विधि है. सबसे पहले सूखी मूली को गरम पानी में लगभग पांच मिनट भिगोया जाता है, ताकि वह नरम हो जाए. इसके बाद मूली को अच्छी तरह निचोड़ लिया जाता है, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाए. फिर कढ़ाही में तेल गरम कर उसमें प्याज़, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डाली जाती है. जब यह सामग्री भुन जाए, तब इसमें टमाटर और मसाले मिलाए जाते हैं. इसके बाद निचोड़ी हुई मूली डालकर सब्ज़ी को धीमी आंच पर पकाया जाता है.
जब मूली और मसाले अच्छे से मिल जाएं और सब्ज़ी पूरी तरह पक जाए, तब अंत में इसमें थोड़ा सा पुदीना डाल दिया जाता है. पुदीना इसके स्वाद और खुशबू को और भी बढ़ा देता है. यह सब्ज़ी दाल-चावल या रोटी के साथ बड़े चाव से खाई जाती है.
दारमा क्षेत्र की यह मूली केवल खाने का साधन नहीं है, बल्कि हिमालयी जीवनशैली, पारंपरिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. बदलते समय के बावजूद, यह परंपरा आज भी जीवित है और लोगों को सेहतमंद बनाए हुए है.
About the Author
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
.