मधुबनी की कोसा कचरी, स्वाद के साथ छुपा है सेहत का खजाना, दूर-दूर से खाने आते हैं लोग

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कोसा कचरी, स्वाद के साथ छुपा है सेहत का खजाना, दूर-दूर से खाने आते है लोग

 

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मिथिला में पकौड़ों के बिना खुशी का जश्न अधूरा माना जाता है. यहां हर छोटे-बड़े अवसर पर तरुआ यानी पकौड़े बनते हैं और प्रेम से परोसे जाते हैं. खासतौर पर कोसा की कचरी का स्वाद लोगों को खूब भाता है. यह व्यंजन साल भर मिलता है, लेकिन सर्दियों में गर्मागर्म पकौड़े खाने का मजा ही अलग होता है. कोसा, केले के पौधे के नीचे निकलने वाला फल होता है, जिसे मैथिली में कचरी कहा जाता है. इसे बनाना थोड़ा मेहनत भरा जरूर है, लेकिन स्वाद उसका पूरा इनाम देता है. इसकी रेसिपी सरल है-कोसा को धोकर उसकी कड़वी बाहरी परतें हटाई जाती हैं, फिर अंदर के नरम हिस्से को बारीक काटकर प्याज मिलाया जाता है.

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कोसा कचरी, स्वाद के साथ छुपा है सेहत का खजाना, दूर-दूर से खाने आते है लोग

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