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Anjan Village Success Story: मध्यप्रदेश के अंजन गांव ने गांव-गांव में मिसाल कायम कर दी है, हर घर बना डेयरी सेंटर. जानिए कैसे युवाओं, महिलाओं और पशुपालकों ने गांव को दुग्ध उत्पादन का गढ़ बना दिया.
हाइलाइट्स
- खंडवा जिले का अंजन गांव आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है.
- यहां की सबसे बड़ी खासियत है हर घर में डेयरी फार्म.
- छोटे से गांव में 40-50 भैंसें या गायें पालना आम बात हो गई है.
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का अंजन गांव आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है. कभी जो गांव खेती पर निर्भर था, वो आज दूध की राजधानी जैसा बन गया है. यहां हर घर में दूध का धंधा इतना जोर पकड़ चुका है कि अब ये गांव आसपास के शहरों और जिलों को भी पोषण दे रहा है.
यहां की सबसे बड़ी खासियत है हर घर में डेयरी फार्म. छोटे से गांव में 40-50 भैंसें या गायें पालना आम बात हो गई है. गांव के बुजुर्ग लाखा चारण बताते हैं कि उनके लिए दूध सिर्फ धंधा नहीं, एक परंपरा है जिसे पीढ़ियों से निभाया जा रहा है.
मेहनत और मैनेजमेंट का कमाल
गांव वाले सिर्फ पशु पालते नहीं, बल्कि उनकी देखभाल भी बहुत सोच-समझकर करते हैं. ठंड-गर्मी में खास इंतजाम, पौष्टिक आहार, समय पर टीका, और साफ-सफाई हर बात का पूरा ध्यान रखा जाता है. यही वजह है कि यहां का दूध क्वालिटी में बेस्ट माना जाता है.
युवाओं की सोच बदली, गांव में ही बना रोजगार
कई युवा जो पहले नौकरी के लिए शहर भागते थे, अब गांव में ही डेयरी फार्म खोलकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ ये युवा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर दूध की प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में भी आगे बढ़ रहे हैं.
महिलाएं बनीं ‘दूध दीदी’
इस बदलाव में गांव की महिलाओं की भी अहम भूमिका है. वे सुबह से शाम तक पशुओं की देखभाल, दूध निकालना, पैकिंग और सफाई तक हर काम में एक्सपर्ट हो चुकी हैं. इससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और आमदनी भी.
सरकार भी बनी साथी
पशुपालन विभाग और प्रशासन की ओर से समय-समय पर ट्रेनिंग, हेल्थ कैंप, लोन और योजनाओं की मदद से किसानों को जरूरी सपोर्ट मिला. इससे डेयरी फार्मिंग करना आसान और मुनाफे का सौदा बन गया.
अंजन गांव की कहानी ये दिखाती है कि अगर मेहनत, समझ और सही प्लानिंग हो, तो गांव भी अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं. अब अंजन सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक इंस्पिरेशन है हर उस गांव के लिए जो बदलना चाहता है.
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