Sudden cardiac arrest in Young Indians: वेदांता ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई है. वे केवल 49 साल के थे. यह कोई पहली बार नहीं है जब एक हाई प्रोफाइल युवक को कार्डिएक अरेस्ट ने लील लिया, बल्कि पिछले कुछ दिनों में हार्ट के डॉक्टर से लेकर सिंगर, कॉमेडियन, एक्टर, बिजनेसमेन, राजनेता, यंग इंडियन्स और स्कूली बच्चे तक कार्डिएक अरेस्ट की वजह से जान गंवा चुके हैं.
देखा जा रहा है कि कोविड के बाद से अचानक होने वाले साइलेंट हार्ट अटैक या सडन कार्डिएक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं. इन केसेज के पीछे क्या वजह है, इस पर न्यूज18 हिंदी को गंगाराम अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट और प्रोफेसर इंटरर्नल मेडिसिन व पद्मश्री अवार्डी डॉक्टर मोहसिन वली ने विस्तार से जानकारी दी है, आइए जानते हैं..
डॉ. मोहसिन वली कहते हैं, ‘आजकल देखने में आ रहा है कि सडन कार्डिएक मौतें बहुत ज्यादा हो रही हैं. चूंकि ये खासतौर पर नौजवानों में हो रही हैं, तो ये बड़ी चिंता विषय है. हमारे देश में पहले ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज अन्य देशों से दस साल पहले होती है, उसको हम यंग कोरोनरी आर्टरी डिजीज या कोरोनरी आर्टरी डिजीज इन यंग एडल्स्ट्स कहते हैं. देखा गया है कि कोविड के बाद सडन कार्डिएक अरेस्ट के केसेज में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. लोग डांस करते हुए, गाते हुए, जिम में वॉक करते हुए अचानक गिर रहे हैं. यहां तक कि छोटे बच्चे भी स्कूल में अचानक बेहोश होकर गिर रहे हैं. जो लोग रेगुलर जिम जाते हैं और व्यायाम आदि कर रहे हैं वे भी इससे नहीं बच पा रहे हैं.
पद्मश्री डॉक्टर मोहसिन वली ने बताया युवाओं को क्यों हो रहा सडन कार्डिएक अरेस्ट?
कुछ ऐसी जन्मजात बीमारियां हैं जिनसे ईसीजी में एब्नॉर्मेलिटी होती है और लोगों को हार्ट अटैक हो सकता है.जैसे ब्रूगाडा सिन्ड्रोम,लॉन्ग क्यूटी सिन्ड्रोम आदि. इनमें जेनेटिक्स की भी भूमिका काफी अहम होती है. जेनेटिक्स इसमें इसमें कॉमन होते हैं और फैमिलीज में सिंड्रोम रन करते रहते हैं.
आजकल ये भी देखने में आया है कि जिनको सडन कार्डिएक अरेस्ट हो रहा है, उनमें स्ट्रैस बहुत ज्यादा देखने को मिल रहा है. कुछ इंटरनेशन समय का चक्र भी इसे प्रभावित कर रहा है, जैसे लोग उन मुल्कों में काम कर रहे हैं, उस वक्त दिन होता है जब भारत में रात होती है. इसके अलावा ज्यादा ड्राइविंग भी एक फैक्टर है, जैसे सेंट्रल दिल्ली में रह रहा व्यक्ति गुड़गांव जाने में दूरी भले कम तय करता है लेकिन यात्रा में ज्यादा समय देता है. इसके साथ ही मल्टीनेशनल कंपनीज में काम करने वाले लोगों में भी तनाव काफी ज्यादा हो रहा है.
इस तरह से हार्ट-अटैक, सडन कार्डिएक अरेस्ट, ब्रेन स्ट्रोक ये सब ठंड के अलावा प्रदूषण से भी बढ़ते हैं. वातावरण में मौजूद खराब गैसें जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड आदि शामिल होती हैं. पीएम 2.5 से ज्यादा छोटे कण जिन्हें माइक्रो फाइन पार्टिकुलेट मेटर कहते हैं.
युवाओं में हार्ट अटैक बढ़ने के कई कारण हैं.
इसके अलावा युवाओं में जंक फूड का प्रचलन काफी बढ़ गया है, जिसमें शुगर भी शामिल है. तीन सफेद चीजें मैदा, चीनी और नमक ये वे चीजें हैं जिनसे बनी चीजें काफी नुकसानदेह हैं. ये चीजें मोटापा बढ़ाती हैं जो सीधे तोंद पर बढ़ता है.
हमारे नौजवान क्या कर रहे हैं
हमारे यहां सिलवट्टे की जगह मिक्सी, साइकिल की जगह कार, सीढ़ियों की जगह लिफ्ट ने ले ली है. ऐसे तमाम रोजमर्रा के मुद्दे हैं जो हमारी हेल्थ को काफी प्रभावित कर रहे हैं. शरीर से कसरत न के बराबर रह गई है, फिर चाहे वह युवाओं की बात हो या स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की.
क्या है समाधान?
डॉ. वली कहते हैं कि हर व्यक्ति समस्या और उसके कारणों को जानने के बाद समाधान चाहता है तो हल सिर्फ यही है कि अपनी लाइफस्टाइल को संयमित, शांत और व्यवस्थित रखें. खाने में हरी सब्जी, मोटा अनाज लें. हफ्ते में 5 दिन व्यायाम करें. संयमित जीवन बिताएं, स्ट्रैस को दूर करें, दुश्मनी, ईर्ष्या-द्वेष को दूर रखें, अच्छा सोचें, अच्छा खाएं और रोजाना पूरी नींद लें, अपने इष्ट का ध्यान करें. यही इस समस्या का हल है .
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