50 से सीधे 500 परसेंट…ट्रंप का नया फरमान का भारत पर क्या होगा असर? निशाने पर चीन और ब्राजील

Trump Tariff on India: वेनेजुएला पर कब्जा जमाने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर भारत और चीन है. ट्रंप ने इन पर अब 500 परसेंट तक भारी-भरकम टैरिफ लगाने की तैयारी में है. भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बने और ये रूस से तेल खरीदना बंद कर दें इसके लिए ट्रंप ने ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025’ के नाम से एक नए बिल को मंजूरी दी है. इस बिल में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और दुनिया के तमाम एनर्जी सेक्टर्स को बदलने की ताकत है.

यह बिल क्यों है खास? 

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का कहना है कि इस बिल के जरिए राष्ट्रपति उन देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे, जो रूस से सस्ता तेल खरीदकर यूक्रेन में जंग जारी रखने की उसकी कोशिशों को मदद दे रहे हैं. बिल के जरिए रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई होगी, जिससे उन देशों पर दबाव बनेगा और वे रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे. ये देश रूस से सिर्फ क्रूड ऑयल ही नहीं, बल्कि यूरेनियम का भी आयात करते हैं.

बुधवार, 7 जनवरी, 2026 को किए गए इस ऐलान को ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ ट्रेड पॉलिसी और यूक्रेन में युद्ध विराम लागू करने की उनकी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है. बुधवार को ट्रंप के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीनेटर ग्राहम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह बिल हमें चीन, भारत और ब्राजील जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर जबरदस्त दबाव बनाने का मौका देगा. ग्राहम ने यह भी कहा कि रूस से सस्ते में तेल खरीदकर से देश कहीं न कहीं यूक्रेन ने जंग जारी रखने में रूस की मदद कर रहे हैं. यूक्रेन समझौते के लिए तैयार है, जबकि पुतिन बेगुनाहों को मारने पर तूला है. 

ट्रंप के फरमान पर भारत का रिएक्शन

भारत पर अभी 50 परसेंट अमेरिकी टैरिफ लगा है. ट्रंप अगर 500 परसेंट तक टैरिफ लगाते हैं, तो यह भारत सहित कई देशों के लिए आर्थिक स्तर पर तबाही से कुछ कम नहीं होगा. यह असल में दुनिया की कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पूरी तरह से ट्रेड बैन लगाने जैसा होगा.

भारत ने अमेरिका के इस दबाव को अनुचित है गैर-वाजिब बताया है क्योंकि भारत के लिए सबसे ज्यादा जरूरी 1.4 अरब लोगों की अपनी आबादी के लिए उर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है. 2025 की डेटा से साफ है कि भारत ने पहले से ही रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज और अन्य सरकारी रिफाइनरियों ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से तेल की खरीद कम कर दी है. इस बीच, भारत ने अमेरिका से क्रूड ऑयल की खरीद को भी लगभग 11 परसेंट तक बढ़ा दिया है. 

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