रांची: झारखंड की राजधानी रांची की अंजू को साउथ में झारखंड वाली दीदी के नाम से लोग जानते हैं. केरल से लेकर आंध्र तक उनके प्रोडक्ट की जबरदस्त डिमांड है. अंजू बताती हैं कि हमारे पास नमकीन के कम से कम 100 वैरायटी मिलेंगे. पुदीना नमकीन से लेकर चना नमकीन हर एक चीज आपको यहां आसानी से मिल जाएगी. उनके यहां एकदम ब्रांडेड की तरफ पैकेजिंग होता है और अभी राज्य में स्टॉल भी लगाए जाते हैं. आज उनके पेटेंट कस्टमर बन चुके हैं.
शादी के 5 साल तक घर से बाहर नहीं निकली अंजू
अंजू ने लोकल 18 को बताया कि एक समय था. जब शादी के 5 साल तक उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी. आंगन में भी सर पर पल्लू रखना पड़ता था. घर की आर्थिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी. ऐसे में किचन से ही कमान संभाला और जो आता था. वही बनना शुरू किया. फिर और महिलाओं को जोड़ा और इस तरीके से आज उनके अंदर 10 महिलाएं काम करती हैं, जिनको वह हर महीने के ₹12000 सैलरी देती हैं.
एक समय घर था चलाना मुश्किल
अंजू बताती हैं कि एक समय उन्हें अपना घर चलाना मुश्किल लग रहा था. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें. ऐसे में सबसे पहले उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखा कि किस तरीके से नमकीन बनाई जाती है. वह घर में खूब ट्राई की. कम से कम नहीं भी तो उन्होंने 50 बार घर में ही नमकीन बनाई होंगी. वह हर बार फेल हो जाती थी, लेकिन फिर से बनाती थी. उन्होंने भी ठान लिया था कि वह बिना बनाए नहीं मानेंगी. अपनी सोच को जारी रखने की वजह से एक दिन उन्हें नमकीन बनाने में सफलता मिल ही गई. फिर उन्होंने एक से बढ़कर एक मिक्सचर से लेकर छोटे समोसे बनाना शुरू किया.
अधिक ऑर्डर मिलने पर दूसरी महिलाओं को भी जोड़ा
फिर धीरे-धीरे मेले में स्टॉल लगाना शुरू किया और लोगों को उनका प्रोडक्ट इतना अच्छा लगने लगा कि एक बार में सारा का सारा प्रोडक्ट आउट ऑफ स्टॉक चला जाता था. अब अकेली इतना बनाना उनके लिए बड़ा मुश्किल हो जात रहा था. अब वह देश के सभी राज्यों में स्टॉल लगाती हैं. अब वहां भी उनके पेटेंट कस्टमर बन गये हैं. वह एक-एक बार में 50 पैकेट ऑर्डर कर देते हैं..ऐसे में उन्हें दूसरी महिलाओं को भी जोड़ना पड़ा, जो हर दिन नमकीन बनाने का काम करती हैं. आज उनके यहां 8 से 10 महिलाएं डेली काम कर रही हैं.
किचन से ही हो जाता है सारा काम
अंजू बताती हैं कि मैं तो प्रोडक्ट की सेलिंग का काम करती ही हूं, लेकिन जो महिलाएं हमारे साथ काम कर रही हैं, वह भी अपने पैरों पर खड़ी हैं. सबसे खास बात यह है कि वह अपना घर का सारा काम करके आती हैं और फिर से यहां किचन में ही आ जाती हैं. यानी उन्हें बाहर जाने की टेंशन नहीं है और साथ में आत्मनिर्भर भी बन रही हैं.
अब परिवार से नहीं है कोई रोक-टोक
चेहरे पर बड़ी सी स्माइल लेते हुए और खुशी से अंजू बताती हैं कि आज वह बहुत खुश हैं. अब कोई रोक-टोक नहीं है. अब सर पर पल्लू रखने का टेंशन भी नहीं है. ये आजादी हमने अपनी मेहनत से और ईमानदारी से और सच्ची लगन से कमाई है. इसीलिए आज बड़ा सुकून मिलता है. आज मैं अपने पैर पर खड़ी होकर पूरे घर को संभाल रही हूं. साथ में हमारे साथ महिलाएं भी अपने घर को संभाल रही हैं. हम सबने आजादी कमाई है. आज हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है. साउथ में जाती हूं तो लोग कहते हैं वाह! ‘झारखंड वाली दीदी’ कहां हैं. आज वह महीने का ढाई लाख रुपये कमा लेती हैं
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