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शहद सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन बाज़ार में मिलावटी शहद पहचानना चुनौती बन गया है. फरीदाबाद में मधुमक्खी पालक प्रविता रानी बताती हैं कि असली शहद समय के साथ जमता है जबकि नकली सालों तक लिक्विड रहता है. सही पहचान से ही सेहत सुरक्षित रह सकती है.
फरीदाबाद: अक्सर हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटी-छोटी चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन वही चीज़ें हमारी सेहत पर बड़ा असर डालती हैं. शहद भी उन्हीं चीज़ों में से एक है. सर्दी-खांसी हो कमजोरी हो या फिर खाली पेट कुछ हेल्दी खाने की बात हो शहद को लोग सबसे भरोसेमंद मानते हैं. लेकिन जब बात बाज़ार से शहद खरीदने की आती है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि जो शहद हम ले रहे हैं वह असली है या नकली?
आजकल बाज़ार में ऐसा शहद आसानी से मिल जाता है जो देखने में बिल्कुल असली लगता है, लेकिन असल में वह नकली होता है. आम आदमी के लिए यह पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कौन-सा शहद शुद्ध है और कौन-सा मिलावटी. इसी चक्कर में कई लोग अनजाने में नकली शहद अपने घर ले आते हैं जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है.
कैसे पहचाने असली शहद
फरीदाबाद में इसी मुद्दे को लेकर Local18 से बातचीत के दौरान प्रविता रानी ने शहद को लेकर कई अहम बातें शेयर कीं. प्रविता रानी पीछे से अंबाला की रहने वाली हैं और पिछले 8 सालों से मधुमक्खी पालन का काम कर रही हैं. उनका कहना है कि शहद की असली पहचान जानना मुश्किल नहीं है बस सही जानकारी होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि शुद्ध और ऑर्गेनिक शहद की सबसे बड़ी पहचान उसका जमना है. असली शहद समय के साथ क्रिस्टलाइज यानी जम जाता है चाहे मौसम सर्दी का हो या गर्मी का.
भारत में पाए जाते हैं 40 तरह का शहद
प्रविता रानी बताती हैं कि शहद का जमना इस बात पर निर्भर करता है कि वह किन फूलों से निकला है. भारत में करीब 40 तरह के शहद पाए जाते हैं और हर शहद का व्यवहार अलग होता है. जैसे मस्टर्ड यानी सरसों का शहद यह बहुत जल्दी जमता है. निकालने के एक हफ्ते के अंदर ही यह देसी घी की तरह जम जाता है. अगर कोई शहद बिल्कुल भी नहीं जमता तो उसमें शक होना चाहिए. हालांकि, कुछ शहद ऐसे भी हैं जो प्राकृतिक रूप से नहीं जमते जैसे बेर का शहद या जम्मू-कश्मीर का एकेसिया हनी. ये शहद न जमने के बावजूद भी पूरी तरह असली और शुद्ध होते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि बाज़ार में मिलने वाला ज्यादातर शहद लिक्विड फॉर्म में ही रहता है और सालों तक वैसा ही रहता है. चाहे उसे 10 साल रखो या 20 साल वह नहीं जमता. यही उसकी सबसे बड़ी पहचान है. ऐसे शहद का स्वाद समय के साथ बदल जाता है, लेकिन उसका टेक्सचर नहीं बदलता. वहीं ऑर्गेनिक और देसी शहद समय के साथ जमता है उसका रंग थोड़ा बदल सकता है स्वाद भी हल्का बदलता है, लेकिन उसकी शुद्धता बनी रहती है.
असली शहद कभी नहीं होता है खराब
प्रविता रानी का कहना है कि असली शहद कभी खराब नहीं होता. आप उसे 50 साल रखें या 100 साल, वह खराब नहीं होगा. बस उसका रंग समय के साथ गहरा हो सकता है. यही वजह है कि शहद को नेचुरल प्रिज़र्वेटिव भी कहा जाता है. इसलिए जब भी शहद खरीदें, सिर्फ पैकिंग और ब्रांड देखकर भरोसा न करें बल्कि उसकी पहचान जरूर जानें. थोड़ी सी समझदारी आपको नकली शहद से बचा सकती है और आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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